Potka News : झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी छात्रों की शिक्षा और आवासीय सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। इसका ताजा उदाहरण पोटका प्रखंड के गवालकाटा पंचायत स्थित सबरनगर राजकीय अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय में देखने को मिला, जहां औचक निरीक्षण के दौरान स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे हुए इस निरीक्षण में विद्यालय की हालत इतनी खराब पाई गई कि विधायक भावुक और आक्रोशित दोनों नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रधानाध्यापक शशिकांत पाठक और सुपरिटेंडेंट हेमंत कुमार को कड़ी फटकार लगाते हुए सात दिनों के भीतर सुधार करने का सख्त निर्देश दिया।

औचक निरीक्षण में खुली जमीनी हकीकत
विधायक संजीव सरदार के अचानक विद्यालय पहुंचने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ प्रखंड कल्याण पदाधिकारी नीरज सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। विद्यालय में कुल 248 आदिवासी छात्र रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली सुविधाएं बेहद दयनीय स्थिति में पाई गईं। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि कागजों पर चल रही योजनाएं धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं। छात्रों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।


नाश्ते में गड़बड़ी, बच्चों ने खुद खोली पोल
निरीक्षण के समय नाश्ते का समय था, लेकिन छात्रों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा था। विधायक को देखते ही छात्र खुद आगे आए और उन्होंने पूरे विद्यालय का भ्रमण कराते हुए वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। बच्चों ने बताया कि उन्हें अक्सर अधूरा या निम्न गुणवत्ता का नाश्ता दिया जाता है। मेन्यू में शामिल केला, इडली, उपमा जैसी चीजें शायद ही कभी मिलती हैं। छात्रों की शिकायतों ने यह साफ कर दिया कि विद्यालय प्रशासन द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

हॉस्टल और शौचालय की स्थिति भयावह
विद्यालय के हॉस्टल और शौचालय की स्थिति बेहद खराब पाई गई। शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ था और चारों ओर दुर्गंध फैली हुई थी। छात्र गंदगी और अस्वच्छ वातावरण में रहने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। कमरों में पंखे और लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। कई बेड बिना चादर के पाए गए। भीषण गर्मी में बिना पंखे के रहना छात्रों के लिए अत्यंत कष्टदायक साबित हो रहा है। इस स्थिति को देखकर विधायक संजीव सरदार काफी व्यथित हो उठे और उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए।


भोजन में भारी लापरवाही, गुणवत्ता पर सवाल
निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। छात्रों ने बताया कि दूध में लगभग 80 प्रतिशत पानी मिलाया जाता है और होर्लिक्स की जगह केवल चीनी दी जाती है। सब्जियों में घटिया तेल का उपयोग किया जाता है, जिससे बदबू आती है और खाने की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भोजन बनाने के लिए रसोइया छात्रों से बाहर से पानी मंगवाता है, जो प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा को दर्शाता है। इस पर विधायक ने कड़ी नाराजगी जताई और जिम्मेदारों को फटकार लगाई।

बिजली, पानी और खेल सुविधाओं का अभाव
विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी भारी अभाव देखा गया। पिछले छह वर्षों से जेनरेटर खराब पड़ा हुआ है, लेकिन उसे ठीक कराने की कोई पहल नहीं की गई। बिजली और पंखों की कमी के कारण छात्र गर्मी में परेशान हैं। इसके अलावा खेल सामग्री की भी भारी कमी है। छात्रों ने बताया कि उन्हें फुटबॉल तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, और कई बार वे अपनी किताबें बेचकर खेल सामग्री खरीदने को मजबूर हो जाते हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि वे किसी सुविधा की मांग करते हैं, तो प्रबंधन द्वारा भोजन में कटौती कर दी जाती है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


सात दिन में सुधार नहीं तो कार्रवाई तय
निरीक्षण के बाद विधायक संजीव सरदार ने साफ शब्दों में कहा कि विद्यालय की वर्तमान स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है और छात्रों को नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने मौके पर ही डीडीसी को मामले की जानकारी दी और सभी संबंधित कर्मियों को सात दिनों के भीतर सुधार करने का अल्टीमेटम दिया। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं विद्यालय की निगरानी करेंगे और छह महीने के भीतर यहां की व्यवस्था को पूरी तरह सुधारने का प्रयास करेंगे। साथ ही, उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।