Jamshedpur News: जमशेदपुर में प्रकृति पर्व सरहुल को लेकर उत्साह चरम पर है। शहर की सांस्कृतिक फिजां अब सखुआ के फूलों की खुशबू और मांदर की थाप से गूंजने वाली है। हाल ही में सीतारामडेरा स्थित सरना भवन में 'केंद्रीय सरहुल पूजा समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें उत्सव की रूपरेखा और भव्य शोभायात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।

भव्य शोभायात्रा और आयोजन की तिथि
बुधवार को सुखराम लकड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 21 मार्च को सीतारामडेरा से विशाल सरहुल शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अटूट आस्था और प्रकृति के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक होगी। समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया है कि इस वर्ष का आयोजन पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य और अनुशासित होगा, ताकि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संदेश दूर-दूर तक पहुंचे।
पहली बार 'बेस्ट ड्रेस कोड और अनुशासन' पर पुरस्कार
इस वर्ष के आयोजन की सबसे अनूठी विशेषता इसकी प्रतियोगितात्मक और अनुशासित पहल है। समिति ने निर्णय लिया है कि शोभायात्रा में शामिल होने वाले विभिन्न दलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जाएगा।
- बेस्ट ड्रेस कोड: पारंपरिक वेशभूषा को सही ढंग से प्रदर्शित करने वाले दल को सम्मानित किया जाएगा।
- बेस्ट अनुशासन: जो दल पूरी गरिमा और शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा का हिस्सा बनेंगे, उन्हें विशेष पुरस्कार दिया जाएगा।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति जागरूक करना और समाज में अनुशासन का संदेश देना है।
विविधता में एकता: विभिन्न समुदायों की भागीदारी
सरहुल का यह उत्सव सामाजिक एकजुटता का अनुपम उदाहरण पेश करेगा। इस शोभायात्रा में केवल एक वर्ग नहीं, बल्कि आदिवासी-मूलवासी समाज के विभिन्न समुदायों का संगम देखने को मिलेगा। इसमें उरांव, हो, मुंडा, तुरी, भुईयां और मुखी समेत कई अन्य समाजों के लोग शामिल होंगे। सैकड़ों की संख्या में महिलाएँ, पुरुष और बच्चे अपने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर, मांदर और नगाड़ों जैसे वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते हुए नजर आएंगे। यह दृश्य जमशेदपुर की बहुसांस्कृतिक पहचान को और मजबूती प्रदान करेगा।
निर्धारित रूट और सजावट की योजना
शोभायात्रा का मार्ग शहर के प्रमुख हिस्सों को कवर करेगा, जिससे पूरा जमशेदपुर उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा। निर्धारित रूट के अनुसार:
प्रारंभ: सीतारामडेरा से शुरुआत।
प्रमुख पड़ाव: एग्रीको गोलचक्कर, तीन नंबर गोलचक्कर, भालुबासा, भगवान बिरसा मुंडा साकची गोलचक्कर।
मुख्य मार्ग: बसंत टॉकीज रोड, हावड़ा ब्रिज, आरडी टाटा गोलचक्कर, गोलमुरी गोलचक्कर और आकाशदीप प्लाजा।
समापन: पुनः सीतारामडेरा में विसर्जन।
उत्सव को खास बनाने के लिए पूरे मार्ग को प्राकृतिक प्रतीकों, पारंपरिक सरना झंडों और रंग-बिरंगे बैनरों से सजाया जाएगा, जिससे शहर में एक आध्यात्मिक और प्राकृतिक माहौल निर्मित होगा।
समिति के सदस्यों की सक्रियता और उपस्थिति
बैठक के दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए कई गणमान्य व्यक्तियों और समाजसेवियों ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर राकेश उरांव, सुरा बिरुली, राजन कुजूर, नन्दलाल पातर, राजेश कंडेयांग, प्रकाश कोया और बुधराम खलको सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। इनके अलावा उपेंद्र बानरा, किशोर लकड़ा, प्रेम सामद, संतोष लकड़ा, और महिला शक्ति के रूप में शालू लकड़ा, कंचन तिर्की व दुर्गा मुनी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि सरहुल का यह पर्व प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेने का दिन है।
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