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परसुडीह-बागानटोला चौक में सिदो-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण 30 को होगा


Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह अंतर्गत बागानटोला चौक में वीर शहीद सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं। इस ऐतिहासिक पहल के तहत प्रतिमा स्थल पर प्लेटफॉर्म निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य पूरी धार्मिक और पारंपरिक श्रद्धा के साथ शुरू कर दिया गया है। आगामी 30 जून को 'हूल दिवस' के पावन अवसर पर इस भव्य प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को झारखंड के वीर शहीदों के गौरवशाली इतिहास, उनके संघर्षों और उनकी जीवनी से रूबरू कराना है, ताकि वे अपने समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।

पारंपरिक रीति-रिवाज से भूमि पूजन व निर्माण कार्य का शुभारंभ किया


बागानटोला चौक पर सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा की स्थापना के लिए सबसे पहले भूमि का चयन कर उसे पवित्र किया गया। इसके बाद आदिवासी समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इस मांगलिक और ऐतिहासिक अवसर पर गांव के नायके बाबा (पुजारी) और पूर्व माझी बाबा की गरिमामयी उपस्थिति में विशेष प्रार्थना की गई, जिसमें समाज की सुख, समृद्धि और इस कार्य की सफलता की कामना की गई। पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद प्रतिमा स्थापित करने वाले स्थल पर प्लेटफॉर्म (चबूतरा) के निर्माण और उसके आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया।

हूल दिवस पर 30 जून को होगा प्रतिमा का भव्य अनावरण

झारखंड के इतिहास में 30 जून का दिन एक मील का पत्थर है, जिसे 'हूल दिवस' या 'संथाल विद्रोह दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने के लिए बागानटोला चौक में सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा के अनावरण की तिथि 30 जून तय की गई है। इस दिन आयोजित होने वाले भव्य समारोह में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और भारी संख्या में ग्रामीण हिस्सा लेंगे। स्थानीय आयोजन समिति इस अनावरण समारोह को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भव्य बनाने के लिए दिन-रात तैयारियों में जुटी हुई है, ताकि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।

सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा स्थापित होना गर्व की बात


इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के पूर्व मुखिया ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि बागानटोला जैसी घनी आबादी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाली बस्ती में सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा स्थापित होना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की आधुनिक और तेजी से बदलती दुनिया में हमारी नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के बलिदानों को भूलती जा रही है। इस चौक पर प्रतिमा की स्थापना से युवाओं को प्रतिदिन इन महान स्वतंत्रता सेनानियों को देखने और उनकी जीवनी को गहराई से समझने का एक बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा। यह प्रतिमा उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी।

युवा पीढ़ी सीख सकेंगे देशप्रेम व सामाजिक एकता का पाठ 


उपमुखिया तरुण हाजरा ने प्रतिमा निर्माण कार्य की देखरेख करते हुए कहा कि इस चौक पर प्रतिमा का स्थापित होना पूरे परसुडीह क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। हमारा मुख्य उद्देश्य इस स्थल को केवल एक स्मारक बनाना नहीं, बल्कि इसे प्रेरणा का एक ऐसा केंद्र विकसित करना है जहां आकर हमारी युवा पीढ़ी देशप्रेम और सामाजिक एकता का पाठ सीख सके। तरुण हाजरा ने क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह प्रतिमा आने वाले समय में युवाओं के भीतर अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और समाज सेवा की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

सिदो-कान्हू ने दमनकारी जमींदारों के खिलाफ फूंका था बिगुल 


स्थानीय वरिष्ठ सदस्य दुखू मुर्मू ने इस अवसर पर सिदो-कान्हू के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन वीर शहीदों ने ब्रिटिश हुकूमत और दमनकारी जमींदारों के खिलाफ जो बिगुल फूंका था, वह आज भी हमारे समाज का मार्गदर्शन करता है। दुखू मुर्मू ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बागानटोला चौक पर इस भव्य प्रतिमा का निर्माण हमारी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रखने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और आवश्यक कदम है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे अपने पारंपरिक मूल्यों को समझें, उनका सम्मान करें और शहीदों के दिखाए गए सच्चाई व संघर्ष के मार्ग पर आगे बढ़ें।

शहीदों के विचार व उनका साहस सबसे बड़ा मार्गदर्शक


सामाजिक कार्यकर्ता सलमान बास्के ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि सिदो-कान्हू का जीवन हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना और समाज को एकजुट रखना सिखाता है। आज के समय में जब समाज को विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, तब शहीदों के विचार और उनका साहस हमारे लिए सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। सलमान बास्के ने स्थानीय युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे हूल दिवस के इस पावन अवसर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को सफल बनाएं। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, शिक्षा के प्रसार और सामूहिक विकास के लिए सभी ग्रामीणों से एकजुट रहने की पुरजोर अपील की।

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