New Delhi : वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में गहराते तनाव का सीधा असर अब भारतीय आम जनजीवन पर पड़ने लगा है। शुक्रवार सुबह 6 बजे से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का कुछ भार अब उपभोक्ताओं को उठाना होगा। इस फैसले के तहत पेट्रोल में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।




चार साल बाद कीमतों में बड़ी हलचल
यह वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में पिछले लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं। साल 2022 के बाद यह पहली बार है जब ईंधन की कीमतों में इस तरह का सीधा और बड़ा इजाफा देखा गया है। पिछले करीब चार वर्षों से वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया था, लेकिन पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध की स्थिति ने सप्लाई चेन को इस कदर प्रभावित किया है कि अब कीमतों को स्थिर रखना कंपनियों के लिए असंभव हो गया था।

वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है खामियाजा
ईंधन की कीमतों में इस अचानक उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में छिड़ी जंग है। यह क्षेत्र दुनिया के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र है, और यहां चल रहे संघर्ष ने समुद्री व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। तेल के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा लागत बढ़ने के कारण कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति कम होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है, जिसका खामियाजा अब भारतीय वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।

तेल कंपनियों और सरकार की विवशता
पिछले कई दिनों से पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल विपणन कंपनियों के बीच चल रही बैठकों में इस बात के संकेत मिल रहे थे कि आपूर्ति में कमी आ रही है। कंपनियों का तर्क था कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा मिलता रहा और घरेलू स्तर पर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो उनके घाटे का ग्राफ बेकाबू हो जाएगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी को एक अनिवार्य कदम बताया है, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति के अनिश्चित भविष्य को देखते हुए रणनीतिक तेल भंडार को सुरक्षित रखना और अर्थव्यवस्था के संतुलन को बनाए रखना पहली प्राथमिकता बन गई है।

आम जनता के बजट पर दोहरी मार
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये से अधिक की यह बढ़ोतरी केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगी। इसका सीधा प्रभाव माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर पड़ता है। डीजल महंगा होने का अर्थ है कि खेतों से मंडियों तक अनाज और सब्जियां पहुँचाना महंगा हो जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की संभावना है। आम आदमी, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहा है, उसके लिए महीने का बजट संतुलित करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।

परिवहन क्षेत्र में बढ़ती चिंता
देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने इस वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डीजल की कीमतों में 3.11 रुपये का उछाल ट्रक मालिकों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के परिचालन खर्च को काफी बढ़ा देगा। कई राज्यों में बस किराए और टैक्सी किरायों में बढ़ोतरी की मांग उठने लगी है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि उनकी बचत को खत्म कर देगी और इसका अंतिम बोझ ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा। ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी सेवाओं पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

भविष्य की चुनौतियां व बाजार का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ता है, तो आने वाले समय में कीमतों में और भी इजाफा देखा जा सकता है। वर्तमान में जो बढ़ोतरी की गई है, वह केवल तात्कालिक संकट को देखते हुए है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता यदि जारी रही, तो भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक उपायों पर और तेजी से काम करना होगा। फिलहाल, उपभोक्ताओं को इस नई महंगाई के साथ तालमेल बिठाना होगा, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियां अभी राहत मिलने के संकेत नहीं दे रही हैं।