विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति संरक्षण का लिया गया संकल्पJamshedpur News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिले के केरूआडूंगरी पंचायत अंतर्गत तुरामडीह गांव में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना, वृक्षों के महत्व को समझाना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश देना था। इस अवसर पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण किया और प्रकृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। मुखिया कान्हू मुर्मू ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि यह हमारी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए। प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना संभव नहीं है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
महिलाओं, युवाओं और बच्चों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गांव के विभिन्न हिस्सों में पौधे लगाए गए तथा लोगों को वृक्षों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं ने घर-परिवार और समाज में पर्यावरण संरक्षण की भूमिका पर अपने विचार रखे, वहीं युवाओं ने भविष्य में भी वृक्षारोपण अभियान चलाने का संकल्प लिया। बच्चों ने भी पर्यावरण बचाने से जुड़े संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
ग्रामीणों का मानना था कि यदि बच्चों और युवाओं में शुरू से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए तो आने वाले समय में प्रकृति संरक्षण का अभियान और अधिक प्रभावी हो सकता है। कार्यक्रम ने समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना विकसित करने का कार्य किया।
जल संरक्षण और स्वच्छ वातावरण पर हुई चर्चा
वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं की समस्या और गंभीर हो सकती है। इस दौरान लोगों से वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की अपील की गई। ग्रामीणों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
पेड़ों की कटाई से बढ़ रहा पर्यावरणीय संकट
मुखिया कान्हू मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि लगातार हो रही पेड़ों की कटाई पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जंगलों की कमी का सीधा प्रभाव जलवायु, वर्षा चक्र और जैव विविधता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह वृक्षों का विनाश जारी रहा तो आने वाले समय में ऑक्सीजन सहित कई प्राकृतिक संसाधनों का संकट उत्पन्न हो सकता है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के पीछे भी पर्यावरण असंतुलन एक बड़ा कारण है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
“हर घर एक पौधा, हर मन पर्यावरण के प्रति जागरूक” का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुखिया कान्हू मुर्मू ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा—
"हर घर एक पौधा, हर मन पर्यावरण के प्रति जागरूक। आइए, हम सभी मिलकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें और कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करें।"
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह केवल वृक्षारोपण का अभियान नहीं बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने की पहल है।
उनके इस संदेश को उपस्थित ग्रामीणों ने सराहा और इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया। लोगों ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जल स्रोतों की रक्षा करने तथा स्वच्छता को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं होगा। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल वृक्षारोपण तक सीमित रहा, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी बना। मुखिया कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में चला यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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