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चाईबासा की 23 साल की कल्पना बनीं कॉलेज प्रोफेसर, पूरे इलाके का नाम किया रोशन

चाईबासा / कुमारडुंगी: अगर मन में कुछ बड़ा करने की ठान ली जाए और मेहनत पक्की हो, तो कम उम्र में भी बहुत बड़ी कामयाबी मिल सकती है। हमारे पश्चिम सिंहभूम जिले के कमारहातु गांव की एक बेटी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। गांव की बेटी ख्रिस्टिना की कामयाबी के बाद, अब एक और बेटी कल्पना ने पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। कल्पना ने सिर्फ 23 साल की उम्र में कुमारडुंगी डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर (कॉलेज की टीचर) बनकर इतिहास रच दिया है। अब वे कॉलेज के छात्र-छात्राओं को पढ़ाएंगी और उनका भविष्य संवारेंगी।

जानिए कौन हैं कल्पना?

कल्पना के माता-पिता इलाके के जाने-माने लोग हैं। उनके पिता कृष्णा सर एक शिक्षक (टीचर) हैं और उनकी मां जुलियाना मतकमहातु पंचायत की मुखिया हैं। घर में पढ़ाई-लिखाई का अच्छा माहौल होने और माता-पिता के सही रास्ते दिखाने की वजह से कल्पना का मन बचपन से ही पढ़ाई में खूब लगता था। पिता से उन्हें शिक्षा और मां से समाज की सेवा करने की सीख मिली।

प्ले-स्कूल से लेकर बनारस यूनिवर्सिटी तक की पढ़ाई

कल्पना की यह कामयाबी सालों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। उनकी पढ़ाई का सफर कुछ इस तरह रहा:

  • बचपन की पढ़ाई: उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मतकमहातु के एक छोटे से 'नर्सरी-प्ले हाउस' स्कूल से शुरू की।
  • स्कूली शिक्षा: इसके बाद उन्होंने मैट्रिक (10वीं) तक की पढ़ाई संत जेवियर्स गर्ल्स हाई स्कूल, चाईबासा से पूरी की।
  • इंटर की पढ़ाई: स्कूल खत्म करने के बाद वे रांची चली गईं और उर्सलाइन कॉन्वेंट, रांची से इंटर पास किया।
  • कॉलेज (BA): आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने झारखंड के मशहूर संत जेवियर्स कॉलेज, रांची में दाखिला लिया और वहाँ से कॉलेज की पढ़ाई पूरी की।
  • बड़ी डिग्री (MA): इसके बाद वे देश के सबसे बड़े और मशहूर विश्वविद्यालयों में से एक बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), वाराणसी गईं और वहां से हिंदी विषय में एम.ए. की डिग्री ली।

सिर्फ 23 साल की उम्र में दो बार पास की देश की सबसे बड़ी परीक्षा

कॉलेज में प्रोफेसर बनने के लिए देश में एक बहुत ही कठिन परीक्षा होती है, जिसे NET कहा जाता है। कल्पना ने अपनी पढ़ाई के दौरान ही इस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उनकी काबिलियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल 2024 और साल 2025 में लगातार दो बार हिंदी विषय में इस कठिन परीक्षा को पास किया। इसी भारी सफलता की वजह से इतनी कम उम्र (23 साल) में उन्हें कुमारडुंगी डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी मिली है।

पूरे इलाके में खुशी का माहौल, मिल रही हैं बधाइयां

कल्पना की इस बड़ी कामयाबी से पूरे कमारहातु और मतकमहातु गांव में त्योहार जैसा माहौल है। लोग खुशी से उनके घर जाकर माता-पिता को बधाई दे रहे हैं। मसकल फाउंडेशन के साथियों और सभी ग्रामवासियों ने कल्पना को इस कामयाबी के लिए ढेर सारी बधाइयां दी हैं और उनके आने वाले सुनहरे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। गांव के लोगों का कहना है कि कल्पना ने यह साबित कर दिया कि हमारे गांव की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। वे अब गांव के बाकी बच्चों के लिए एक मिसाल बन गई हैं।

सामुदायिक पुस्तकालय से संवर रहा गांव का भविष्य: संजय कच्छप 

लाइब्रेरी मैन ऑफ झारखंड संजय कच्छप ने चाईबासा जैसे छोटे शहर की बेटी कल्पना के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी कामयाबी उच्च शिक्षा का सपना देख रहे विद्यार्थियों के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बनेगी। इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है, जहां कल्पना के पिता के सहयोग से उनके गांव में एक सामुदायिक पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा है। इस पुस्तकालय में गांव के बच्चे बिना किसी शुल्क के आकर मन लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं और उनके पिता खुद आगे बढ़कर इन बच्चों को जीवन में प्रगति करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में शिक्षा की एक नई अलख जाग रही है।

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