रांची/जमशेदपुर: झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास और शहरी व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने नगर विकास एवं आवास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का आकलन किया गया और चालू वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शहरी विकास का मुख्य उद्देश्य केवल सड़कों और भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है. बैठक के दौरान बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर कई कड़े और दूरगामी निर्देश जारी किए गए. बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सहित राज्य के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे.
जलस्रोतों पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में जल संकट और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए जलस्रोतों के संरक्षण पर सबसे अधिक जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया कि शहरों से गुजरने वाली सभी नदियों, तालाबों, डैमों, नालियों और अन्य जलस्रोतों पर किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल ध्वस्त किया जाए.मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी और तालाबों के किनारों को पाटकर मकान या व्यावसायिक संरचनाएं खड़ा करना पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है. इससे शहरों की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है, जो अंततः गंभीर बाढ़ और जलजमाव का कारण बनती है. इस प्रकार की लापरवाही और अवैध कृत्य किसी भी परिस्थिति में क्षमा योग्य नहीं हैं.
अवैध कब्जाधारियों को लिखित नोटिस करें
जलस्रोतों को मुक्त कराने की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक निश्चित कार्ययोजना के तहत काम करने को कहा है. इसके तहत सभी शहरी निकायों में अवस्थित जलस्रोतों का तत्काल एक गहन सर्वे कराया जाएगा. सर्वे के माध्यम से उन सभी अवैध संरचनाओं को चिन्हित किया जाएगा जो नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई हैं.चिन्हित किए गए अवैध निर्माणों के मालिकों को पहले लिखित नोटिस जारी किया जाएगा. यदि नोटिस के बाद भी तय समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी. इसके बाद जिला प्रशासन और नगर निकाय युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.
कांके डैम के संरक्षण के लिए कैचमेंट एरिया की होगी घेराबंदी
राजधानी रांची की लाइफलाइन माने जाने वाले कांके डैम के अस्तित्व और उसकी स्वच्छता को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ठोस और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांके डैम के कैचमेंट एरिया (जलभराव क्षेत्र) की शीघ्र मापी कराई जाए और भू-माफियाओं से बचाने के लिए इसकी पूरी घेराबंदी की जाए. इसके साथ ही, डैम के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है. डैम एरिया में सीधे गिरने वाले सभी गंदे नालों और नालियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे स्थानीय नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ें और जागरूक करें कि घरों से निकलने वाला केमिकल युक्त या गंदा पानी सीधे डैम में न जाए, ताकि राजधानी वासियों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके.
रिंग रोड पर स्थापित होंगे सोलर पैनल और स्ट्रीट लाइट
शहरी बुनियादी ढांचे को पर्यावरण अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है. रांची सहित झारखण्ड के जिन-जिन शहरों में रिंग रोड का निर्माण हुआ है, उनके आसपास की खाली भूमि का उपयोग सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित करने के लिए किया जाएगा. इन रिंग रोड के किनारे बड़े पैमाने पर सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पन्न होने वाली बिजली से पूरी सड़क को सोलर स्ट्रीट लाइट के माध्यम से रोशन किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अधिकारियों को अगले 15 दिनों के भीतर सोलर पैनल और स्ट्रीट लाइट लगाने से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट से पारित कराने का समय दिया है. इसके अतिरिक्त, रिंग रोड क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वाटर पाइपलाइन और सीवर लाइन की संरचना भी साथ-साथ विकसित की जाएगी.
हर घर के लिए अनिवार्य होगा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व रेन वाटर हार्वेस्टिंग
शहरी क्षेत्रों में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी पर विशेष बल दिया है. उन्होंने निर्देश दिया है कि शहरी क्षेत्रों में स्थित प्रत्येक व्यक्तिगत घर, बड़ी-बड़ी हाउसिंग सोसाइटीज, बहुमंजिला अपार्टमेंट, बड़े होटलों और पॉश इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस कचरा प्रबंधन), रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) और वाटर वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था करना अनिवार्य किया जाए. नगर निकायों को निर्देशित किया गया है कि वे इसके लिए एक प्रभावी नियमावली और कार्ययोजना बनाएं. नागरिकों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया जाए और नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए. जनभागीदारी बढ़ने से न केवल शहरों का कचरा कम होगा, बल्कि मानसून के दौरान वर्षा जल का संचयन होने से वाटर टेबल में भी सुधार होगा.
झिरी के कचरे के पहाड़ों का आधुनिक तकनीक से होगा निस्तारण
वर्तमान समय में देश के सभी बड़े शहरों की तरह रांची और झारखण्ड के अन्य नगरों में भी कचरे के पहाड़ यानी 'लिगेसी वेस्ट' एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बनकर उभरे हैं. रांची के झिरी स्थित डंपिंग यार्ड में जमा कचरे के निस्तारण को लेकर बैठक में मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ.मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और वैश्विक उपायों के माध्यम से इस कचरे का स्थाई समाधान निकाला जाए. इसके लिए उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने घरों में ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की आदत डालें. अलग किए गए बायोडिग्रेडेबल (गीले) कचरे से जैविक उर्वरक और ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकेगा, जबकि नॉन-बायोडिग्रेडेबल (सूखे) कचरे का पुनर्चक्रण (Recycling) कर उसे दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा.
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम होगा मजबूत
शहरी यातायात को सुगम और जाम मुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने तकनीकी बदलावों को अपनाने का निर्देश दिया है. राज्य के प्रमुख शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम आधुनिक शहरी नियोजन तकनीकों और डिजिटल सर्विलांस को बढ़ावा दिया जाएगा. अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से न केवल यातायात व्यवस्था दुरुस्त होगी, बल्कि समय की बचत और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी. इसके अलावा, नगर विकास की विभिन्न परियोजनाओं में होने वाले अनावश्यक विलंब को रोकने के लिए 'डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम' को और अधिक सशक्त और जवाबदेह बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि किसी भी स्तर पर फाइलों के अटकने या काम में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. सभी चालू जलापूर्ति योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है.
राजमहल, साहिबगंज और धनबाद के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की ऑनलाइन समीक्षा
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल कागजी दावों पर भरोसा न करते हुए जमीनी हकीकत का जायजा लिया. उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से सीधे राज्य के राजमहल, साहिबगंज और धनबाद जिलों से जुड़कर वहां निर्माणाधीन और संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कार्यप्रणाली की लाइव समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने स्क्रीन पर इन प्लांटों की संरचनाओं और उनकी वर्तमान स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया. उन्होंने जिलाधिकारियों और प्लांट के इंजीनियरों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि गंदे पानी को बिना ट्रीट किए किसी भी नदी या जलस्रोत में न बहाया जाए. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित होना चाहिए.
मानसून से पहले जलजमाव का स्थाई समाधान व पेड़ों की ट्रिमिंग का आदेश
आगामी मानसून के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने नगर निकायों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है. उन्होंने सभी नगर निगमों और नगर परिषदों को निर्देश दिया कि बरसात शुरू होने से पहले ही शहरों के सभी बड़े नालों की सफाई (Desilting) पूरी कर ली जाए ताकि जलजमाव की समस्या उत्पन्न न हो. इसके साथ ही, शहरी क्षेत्रों की खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को तत्काल दुरुस्त करने को कहा गया है. एक और महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून की तेज हवाओं और बारिश के कारण अक्सर सड़क किनारे लगे पेड़ या उनकी भारी शाखाएं विद्युत तारों और चलती गाड़ियों पर गिर जाती हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं. इससे बचने के लिए बारिश के मौसम से पहले ही सभी मुख्य सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से ट्रिमिंग कराई जाए. इससे पेड़ों को एक सुंदर आकार भी मिलेगा और संभावित खतरों को भी टाला जा सकेगा. इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, रांची नगर निगम के आयुक्त सुशांत गौरव सहित सूडा, डीएमए और जुडको के वरिष्ठ निदेशक व महाप्रबंधक उपस्थित थे.
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