C. Joseph Vijay: तमिल फिल्मों के सुपरस्टार C. Joseph Vijay ने आखिरकार राजनीति के मंच पर भी वही कर दिखाया, जिसकी कल्पना उनके प्रशंसक वर्षों से करते आ रहे थे। फिल्मों में भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने वाले “मसीहा” की छवि को उन्होंने वास्तविक राजनीति में बदलते हुए तमिलनाडु की सत्ता तक का सफर तय किया। 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन किया और विजय मुख्यमंत्री बने।

फिल्मों की लोकप्रियता बनी सबसे बड़ी ताकत
विजय की राजनीति की नींव उनके विशाल फैन बेस पर टिकी रही। वर्षों तक उनकी फिल्मों में गरीबों, युवाओं और सामाजिक न्याय की बातें दिखाई गईं। “मास हीरो” की यही छवि धीरे-धीरे राजनीतिक समर्थन में बदल गई। उनके प्रशंसकों के संगठन पहले से ही तमिलनाडु के गांव-गांव तक सक्रिय थे। यही नेटवर्क चुनावी मशीनरी में बदल गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोगों ने विजय को केवल अभिनेता नहीं, बल्कि बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा।

TVK की स्थापना और राजनीतिक संदेश
वर्ष 2024 में विजय ने आधिकारिक रूप से अपनी पार्टी TVK की शुरुआत की। उन्होंने साफ कहा कि उनकी राजनीति भ्रष्टाचार, वंशवाद और बेरोजगारी के खिलाफ होगी। उन्होंने खुद को DMK और AIADMK की पारंपरिक राजनीति से अलग दिखाने की कोशिश की। विजय ने युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखकर कई वादे किए। उनकी सभाओं में फिल्मों जैसा माहौल देखने को मिलता था, जहां हजारों समर्थक “थलापति” के नारों के साथ उमड़ पड़ते थे।

चुनावी संघर्ष और गठबंधन की राजनीति
2026 के विधानसभा चुनाव में TVK ने पहली बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरकर बड़ा उलटफेर किया। पार्टी को 108 सीटें मिलीं, जो किसी भी नए दल के लिए ऐतिहासिक प्रदर्शन माना गया। हालांकि पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से वह पीछे रह गई। इसके बाद कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML जैसे दलों ने विजय को समर्थन दिया। इस समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 120 तक पहुंच गया और सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया। 

शपथ ग्रहण बना फिल्मी दृश्य
चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में विजय का शपथ ग्रहण समारोह बिल्कुल किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा नजर आया। हजारों समर्थकों की मौजूदगी, लगातार बजते ढोल-नगाड़े और “थलापति” के नारों के बीच विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसे तमिलनाडु की राजनीति में “नई पटकथा” बताया। खास बात यह रही कि 1967 के बाद पहली बार DMK और AIADMK के बाहर का कोई नेता राज्य का मुख्यमंत्री बना।

नई राजनीति से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने अपने पहले फैसलों में मुफ्त बिजली, महिला सुरक्षा बल और नशा विरोधी अभियान जैसी योजनाओं की घोषणा की।उनके समर्थकों का मानना है कि जिस तरह उन्होंने फिल्मों में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उसी तरह अब वे प्रशासन में बदलाव लाएंगे। हालांकि विपक्ष उन्हें “फिल्मी छवि का राजनीतिक इस्तेमाल” करने वाला नेता बता रहा है, लेकिन जनता का एक बड़ा वर्ग इसे तमिलनाडु की राजनीति में नई शुरुआत मान रहा है। विजय का यह सफर इस बात का उदाहरण बन गया कि लोकप्रियता, रणनीति और सही समय मिल जाए तो फिल्मी पर्दे का नायक वास्तविक सत्ता का भी चेहरा बन सकता है।