Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण परियोजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सेरालडीह से मंदा होते हुए नरसिंहबहाल (ओडिशा सीमा) तक बनने वाली इस सड़क परियोजना से जहां विकास की उम्मीदें जुड़ी हैं, वहीं भूमि मुआवजा भुगतान में देरी ने स्थानीय रैयतों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वे किसी भी हालत में सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे।

माझी बाबाओं के नेतृत्व में उपायुक्त से मुलाकात
इस मुद्दे को लेकर माझी बाबाओं के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन से उनके कार्यालय में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के समक्ष अपनी समस्याएं विस्तार से रखते हुए कहा कि यह परियोजना कई गांवों की जमीन को प्रभावित करेगी। ऐसे में बिना मुआवजा दिए कार्य शुरू करना रैयतों के साथ अन्याय होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि पहले सभी प्रभावित परिवारों को उनका हक दिया जाए, उसके बाद ही विकास कार्य आगे बढ़ाया जाए।


पहले मुआवजा, फिर निर्माण-ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा कि जमीन उनके जीवनयापन का मुख्य आधार है और इसके बदले उचित मुआवजा मिलना उनका कानूनी अधिकार है। पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल जमशेदपुर द्वारा इस सड़क परियोजना को स्वीकृति दी गई है, लेकिन मुआवजा भुगतान को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह निर्णय लिया है कि जब तक भुगतान सुनिश्चित नहीं होता, वे निर्माण कार्य का विरोध करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

पुरानी परियोजनाओं के बकाया भुगतान से बढ़ा अविश्वास
ग्रामीणों के आक्रोश के पीछे एक बड़ा कारण पूर्व में अधूरी रह गई मुआवजा प्रक्रिया भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी पथ निर्माण विभाग द्वारा कई सड़कों के निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उसका मुआवजा अब तक नहीं दिया गया। इस वजह से लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुरानी परियोजनाओं का भुगतान ही लंबित है, तो नई परियोजना में भी वही स्थिति दोहराए जाने की आशंका बनी हुई है।


विधायक को सौंपा ज्ञापन, हस्तक्षेप की मांग
उपायुक्त से मुलाकात के अलावा ग्रामीणों ने पोटका विधायक संजीव सरदार से भी परिसदन में मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विधायक को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा कि अधिकारी इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विधायक से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की। विधायक संजीव सरदार ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे और संबंधित विभागों से बात कर जल्द समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी रैयत के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और मुआवजा भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा।


आंदोलन की चेतावनी, जल्द समाधान की उम्मीद
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि उनके जीवन और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। इस मौके पर माझी बाबा मंदा के जयपाल सिंह मुर्मू, बारेडीह के कामेश्वर माझी, सेरालडीह के लक्ष्मण हांसदा, रामदास हेमब्रम, दासमात मुर्मू, परमेश्वर हेमब्रम, राजेश मार्डी, सुराय हेमब्रम, चंद्र किस्कू, हरी टुडू, चन्द्रय मुर्मू, धीरेन किस्कू, रघुनाथ टुडू, बुधराय मुर्मू समेत कई ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में मुआवजा भुगतान की मांग दोहराई और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की अपेक्षा जताई।