Potka News : झारखंड में पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं को मजबूत बनाने के दावों के बीच पोटका प्रखंड के कोवाली पंचायत सचिवालय की हकीकत ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्य दिवस के बावजूद सचिवालय बंद मिलने पर स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने कड़ा रुख अपनाया और मौके से ही अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की परेशानियों को भी सामने लाती है।


क्षेत्र भ्रमण के दौरान सामने आई लापरवाही
गुरुवार को विधायक संजीव सरदार क्षेत्र भ्रमण पर निकले हुए थे। इसी दौरान वे कोवाली पंचायत सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने पाया कि भवन के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। यह स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई जब यह पता चला कि यह दिन एक नियमित कार्य दिवस था। पंचायत सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान का इस तरह बंद रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


मौके पर नहीं मिला कोई कर्मचारी
निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि पंचायत सचिवालय में प्रखंड या अंचल स्तर का कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं था। न पंचायत सचिव, न सहायक कर्मी—किसी की भी मौजूदगी नहीं थी। इससे स्पष्ट होता है कि निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों को जिन सेवाओं के लिए पंचायत स्तर पर सुविधा मिलनी चाहिए, वे पूरी तरह बाधित हो रही हैं।

ग्रामीणों की शिकायत निकली सही
विधायक के दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि पंचायत सचिवालय अक्सर बंद रहता है। लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी प्रखंड मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। विधायक ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खुद स्थिति की जांच की और पाया कि ग्रामीणों की शिकायत पूरी तरह सही है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


बीडीओ को फोन कर दिए कार्रवाई के निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजीव सरदार ने मौके से ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अरुण कुमार मुंडा को फोन किया। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी देते हुए संबंधित कर्मियों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। विधायक ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी निर्देशों की हो रही अनदेखी
विधायक ने बताया कि राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि सप्ताह में कम से कम दो दिन पंचायत सचिवालय में पंचायत सचिव और अन्य कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इसके लिए प्रखंड स्तर पर रोस्टर भी तय किया जाता है। बावजूद इसके, कोवाली पंचायत में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना भी है।


जनहित प्रभावित, सेवाएं ठप
पंचायत सचिवालय का बंद रहना सीधे तौर पर ग्रामीणों के हितों को प्रभावित करता है। जन्म प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड जैसी कई आवश्यक सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन जब सचिवालय ही बंद रहेगा, तो लोगों को अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए भटकना पड़ेगा। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए काफी परेशान करने वाली है।

सख्त चेतावनी, आगे भी जारी रहेगा निरीक्षण
निरीक्षण के बाद विधायक संजीव सरदार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर सेवाओं को मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और जहां भी लापरवाही पाई जाएगी, वहां कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कर्मियों की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।