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जे-टेट 2026 में 'भूमिज' भाषा की वापसी, विधायक संजीव सरदार के प्रयासों से समाज को मिला अपना अधिकार

 जमशेदपुर: झारखंड के भूमिज समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक सफलता की खबर सामने आई है। झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा आयोजित होने वाली आगामी शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 (J-TET) में जनजातीय भाषा 'भूमिज' को पुनः शामिल कर लिया गया है। यह निर्णय न केवल भाषाई अस्मिता की जीत है, बल्कि पोटका के विधायक संजीव सरदार के उस निरंतर संघर्ष का परिणाम है, जो उन्होंने सदन से लेकर सड़क तक जारी रखा था। झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (संख्या 487/26.03.2026) जारी कर दी है।




एक दशक का लंबा इंतजार के बाद मिली जीत

भूमिज भाषा को जे-टेट 2012 और 2016 की परीक्षाओं के बाद अचानक हटा दिया गया था। इससे भूमिज भाषी युवाओं के सामने शिक्षक बनने और अपनी मातृभाषा के संरक्षण का संकट खड़ा हो गया था। तेंतला में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता में भूमिज विशेषज्ञ हरिश चंद्र सिंह भूमिज और भारतीय आदिवासी भूमिज समाज के प्रदेश अध्यक्ष रथु सिंह सरदार ने बताया कि पिछले कई वर्षों से समाज इस मांग को लेकर आंदोलित था। विधायक संजीव सरदार ने इस विषय की गंभीरता को समझा और इसे अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा।

विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था

विधायक संजीव सरदार ने भूमिज भाषा का मामला विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था. उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकातें कीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों के साथ दर्जनों बार पत्राचार किया। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान जब उन्होंने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया, तो सरकार को भूमिज समाज की वाजिब मांग के आगे झुकना पड़ा। उनके इसी अथक प्रयास का नतीजा है कि आज अधिसूचना जारी कर भूमिज भाषा को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिला है।

भूमिज युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे

अधिसूचना जारी होने के बाद अब भूमिज समाज के शिक्षित युवाओं के लिए शिक्षक बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब युवा अपनी मातृभाषा 'भूमिज' में जे-टेट की परीक्षा दे सकेंगे, जिससे उनके चयन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार ने इस परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए रांची, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों को विशेष परीक्षा केंद्र के रूप में नामित किया है। यह निर्णय इन जिलों में रहने वाली भूमिज आबादी के शैक्षणिक विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।


दिवंगत शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को किया याद

समाज के प्रतिनिधियों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री दिवंगत रामदास सोरेन के योगदान को भी नम आंखों से याद किया। वक्ताओं ने कहा कि जब यह मामला शुरुआती चरण में था, तब दिवंगत मंत्री ने इसके लिए सकारात्मक रुख अपनाया था। उनके द्वारा दिखाई गई दिशा और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दृढ़ निश्चय ने ही इस कार्य को पूर्णता तक पहुँचाया है। समाज ने इस निर्णय को दिवंगत मंत्री के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में स्वीकार किया है।

आभार व स्वागत यात्रा निकालेंगे

इस ऐतिहासिक निर्णय से गदगद भूमिज समाज ने अब एक विशाल 'आभार एवं स्वागत यात्रा' निकालने की योजना बनाई है। समाज के अगुवाओं ने बताया कि वे जल्द ही विधायक संजीव सरदार, घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन, जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी, विधायक समीर कुमार महंती और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सार्वजनिक अभिनंदन करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और समाज को अपनी भाषा व संस्कृति के प्रति और अधिक जागरूक करना है।


बैठक में कई लोगों ने किया शिरकत

तेंतला की इस बैठक में समाज के कई महत्वपूर्ण स्तंभ मौजूद थे। इनमें जुड़ी पंचायत के मुखिया सुकलाल सरदार, सतीश सरदार, पंसस मंजु सरदार, रामेश्वर सरदार, अमल सिंह और मनोरंजन सरदार प्रमुख थे। इनके अलावा ईश्वरलाल सरदार, भृगुराम सरदार, अरूप सरदार, कृष्ण सिंह सरदार, विष्णु पद सरदार, सागर सरदार और लाल सरदार सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह सामूहिक एकता और सही नेतृत्व की जीत है।


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