जमशेदपुर: झारखंड की राजनीति में आदिवासियों के हक और अधिकार की आवाज को बुलंद करने के उद्देश्य से 'भारत आदिवासी पार्टी' ने अपनी कमर कस ली है। रविवार को जमशेदपुर के बालीगुमा स्थित एक निजी होटल में पार्टी की झारखंड प्रदेश इकाई की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रेमशाही मुंडा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में न केवल संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई, बल्कि जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की गई।
सांगठनिक मजबूती और प्रदेश कमेटी का पुनर्गठन
बैठक का मुख्य एजेंडा पार्टी के ढांचे को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना था। प्रेमशाही मुंडा ने स्पष्ट किया कि झारखंड में आदिवासियों की आवाज को सशक्त बनाने के लिए एक मजबूत संगठन अनिवार्य है। इसी क्रम में निर्णय लिया गया कि झारखंड प्रदेश कमेटी का शीघ्र ही पुनर्गठन किया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि जो जिला अध्यक्ष निष्क्रिय पाए गए हैं या अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें बदला जाएगा। नई कमेटी में ऊर्जावान और समर्पित कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाएगी ताकि पार्टी की नीतियों को गांव-गांव तक पहुँचाया जा सके।
अनुशासन समिति और सदस्यता अभियान पर जोर
पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली को पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए एक 'अनुशासन समिति' के गठन का निर्णय लिया गया है। बैठक का संचालन कर रहे कृष्णा हांसदा ने बताया कि संगठन के भीतर अनुशासन सर्वोपरि है। इसके साथ ही, जिन जिलों में अब तक जिला कमेटियों का विस्तार नहीं हो पाया है, वहाँ युद्ध स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य आने वाले महीनों में लाखों नए सदस्यों को जोड़कर झारखंड में एक तीसरे विकल्प के रूप में उभरना है।
आदिवासियों की जमीन पर अतिक्रमण: आंदोलन की चेतावनी
बैठक के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में आदिवासियों की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे और लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन की नाक के नीचे आदिवासियों को उनकी पैतृक संपत्ति से बेदखल किया जा रहा है। प्रेमशाही मुंडा ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जमीन की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लेती है, तो भारत आदिवासी पार्टी राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।
'धर्म कॉलम' और पेसा कानून का पूर्ण क्रियान्वयन
भारत आदिवासी पार्टी ने झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगों को पुनः दोहराया है। पार्टी की मुख्य मांगों में स्वतंत्र धर्म कॉलम (Sarna Dharma Code) की व्यवस्था करना शामिल है, ताकि आदिवासियों की विशिष्ट पहचान सुरक्षित रह सके। इसके अलावा, राज्य में पेसा कानून (PESA Act) को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने की मांग की गई है। वक्ताओं ने कहा कि ग्राम सभाओं को वास्तविक शक्ति दिए बिना आदिवासियों का विकास संभव नहीं है।
'समता जजमेंट 1997' को लागू करने की हुंकार
बैठक में ऐतिहासिक समता जजमेंट 1997 का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। पार्टी ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पूरी तरह लागू किया जाए, जिससे खनिज संपदा और खदानों पर स्थानीय आदिवासियों का मालिकाना हक सुनिश्चित हो सके। इसके लिए पार्टी एक विशेष कार्य दल का गठन करेगी जो लोगों को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा।
रांची में प्रदेश कार्यालय और प्रमंडलीय सम्मेलन की तैयारी
संगठन को नई ऊंचाई देने के लिए राजधानी रांची में जल्द ही पार्टी का भव्य प्रदेश कार्यालय स्थापित किया जाएगा। वहीं, सांगठनिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरायकेला-खरसावां जिले में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में एक विशाल प्रमंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस सम्मेलन की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें राजस्थान के बांसवाड़ा से लोकप्रिय सांसद श्री राजकुमार रोत और राज्य प्रभारी श्री उमेश चंद्र डामोर मुख्य रूप से शिरकत करेंगे। इस सम्मेलन के जरिए कोल्हान प्रमंडल में पार्टी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी।
दिग्गज नेताओं की उपस्थिति और भविष्य की रणनीति
इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे। इनमें पूर्वी सिंहभूम के जिला अध्यक्ष मदन मोहन सोरेन, पश्चिमी सिंहभूम के जिला अध्यक्ष सुशील बारला, गुमला-सिमडेगा के जिला अध्यक्ष अमित चिराग तिर्की और सरायकेला-खरसावां के जिला अध्यक्ष दिवाकर मिंज शामिल थे। इनके अलावा मटका तुरी सुंडी, सनातन सवैया, मोहन सिंह देवगम और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


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