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IBM ने जोडा क्लस्टर को 14 पुरस्कारों से नवाजा

 भुवनेश्वर: टाटा स्टील ने एक बार फिर खनन क्षेत्र में अपनी तकनीकी श्रेष्ठता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का लोहा मनवाया है। ओडिशा के जोडा क्लस्टर में स्थित कंपनी की लौह और मैंगनीज खदानों को प्रतिष्ठित 'खदान पर्यावरण और खनिज संरक्षण (MEMC) सप्ताह 2025–26' के दौरान कुल 14 पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। भुवनेश्वर में भारतीय खान ब्यूरो (IBM) के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समारोह में टाटा स्टील की विभिन्न खदानों को उनकी कार्यकुशलता और सतत विकास के लिए सराहा गया।



भारतीय खान ब्यूरो (IBM) द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर विशेष सम्मान

भुवनेश्वर में आयोजित 27वें MEMC सप्ताह का मुख्य उद्देश्य खनन के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा और खनिजों के वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण को बढ़ावा देना है। शनिवार को आयोजित इस पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में 'भारतीय खान ब्यूरो' के खान नियंत्रक-जनरल श्री पंकज कुलश्रेष्ठ उपस्थित थे। उन्होंने टाटा स्टील के अधिकारियों को पुरस्कृत करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिसमें टाटा स्टील एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।

जोडा ईस्ट और खोंडबोंड खदानों का शानदार प्रदर्शन

पुरस्कारों की 'श्रेणी-A' (Category-A) के अंतर्गत टाटा स्टील की प्रसिद्ध 'जोडा ईस्ट लौह खदान' ने अपनी धाक जमाई। इस खदान को 'खनिज संवर्धन' (Mineral Beneficiation) और 'पुनर्ग्रहण एवं पुनर्वास' (Reclamation & Rehabilitation) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए दो अलग-अलग द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए। केवल इतना ही नहीं, जोडा ईस्ट को इसके 'समग्र प्रदर्शन' (Overall Performance) के लिए भी द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में, 'खोंडबोंड लौह और मैंगनीज खदान' ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए खनिज संवर्धन और पुनर्वास के लिए तृतीय पुरस्कार हासिल किए।

वैज्ञानिक विकास और खनिज संरक्षण में काटामाटी अव्वल

टाटा स्टील की 'काटामाटी लौह खदान' को खनन की वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने में अग्रणी माना गया है। समारोह में इस खदान को 'व्यवस्थित वैज्ञानिक विकास' (Systematic and Scientific Development) के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा, सीमित संसाधनों के बेहतर उपयोग और 'खनिज संरक्षण' की श्रेणी में खदान को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह पुरस्कार दर्शाता है कि कंपनी न केवल उत्पादन पर ध्यान दे रही है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के लिए संसाधनों को बचाने की दिशा में भी काम कर रही है।

'श्रेणी-B' में जोडा वेस्ट और बामेबारी का दबदबा

छोटे और मध्यम स्तर की खदानों की 'श्रेणी-B' (Category-B) में 'जोडा वेस्ट लौह और मैंगनीज खदान' ने सबसे अधिक प्रभावित किया। इस खदान ने 'वनीकरण' (Afforestation) और 'व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक विकास' की श्रेणियों में दो प्रथम पुरस्कार अपने नाम किए। अपने निरंतर बेहतर प्रदर्शन के कारण जोडा वेस्ट को 'समग्र प्रदर्शन' के लिए भी प्रथम पुरस्कार मिला। इसी प्रकार, 'बामेबारी लौह और मैंगनीज खदान' को 'पुनर्ग्रहण एवं पुनर्वास' में प्रथम और 'सतत विकास' में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ, जबकि 'तिरिंगपहाड़ खदान' को वनीकरण में पहला पुरस्कार मिला।

नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) की उपलब्धि

टाटा स्टील समूह का हिस्सा बनने के बाद 'नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड' (NINL) की खदानों में भी बड़े सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान 'नीलाचल खदान' को 'पुनर्ग्रहण एवं पुनर्वास' के क्षेत्र में द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि टाटा स्टील के प्रबंधन में आने के बाद नीलाचल की खदानों में भी पर्यावरण सुरक्षा के मानकों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है और वहां भी सतत खनन (Sustainable Mining) को प्राथमिकता दी जा रही है।

सतत खनन और भविष्य की प्रतिबद्धता: उपस्थित गणमान्य

पुरस्कार ग्रहण करने के दौरान टाटा स्टील के विभिन्न खदानों के प्रमुखों के साथ-साथ कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इनमें IBM के मुख्य खान नियंत्रक श्री जी. काले, जोडा प्रमुख श्री राजेश कुमार, खोंडबोंड प्रमुख श्री जी. वी. सत्यनारायण, मैंगनीज खदान प्रमुख श्री शंभू नाथ झा और नीलाचल खदान प्रमुख श्री राहुल किशोर प्रमुख थे। कंपनी के अधिकारियों ने साझा किया कि टाटा स्टील का लक्ष्य केवल खनिज निकालना नहीं, बल्कि खनन के बाद उस क्षेत्र को पुनः हरा-भरा करना और अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से कचरे को कम कर मूल्यवान खनिजों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।

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