माझी पारगाना माहाल भवन, पावड़ा में आयोजित हुआ समापन समारोह
Jamshedpur News : संताली भाषा, ओलचिकी लिपि और संताल संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित संताली समर कैंप का भव्य समापन समारोह माझी पारगाना माहाल भवन, पावड़ा में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय संताली लेखक संघ झारखंड शाखा तथा अखिल झारखंड संताल शिक्षक फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह में विभिन्न जिलों से आए शिक्षक, प्रखंड समन्वयक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान संताली भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और अलचिकि शिक्षा के विस्तार पर विशेष बल दिया गया।
354 केंद्रों पर संचालित हुआ नि:शुल्क संताली समर कैंप
ग्रीष्मावकाश के दौरान 22 मई से 10 जून तक पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां तथा जामताड़ा जिलों में कुल 354 केंद्रों पर नि:शुल्क संताली समर कैंप का आयोजन किया गया। इन केंद्रों में प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा बच्चों और युवाओं को ओलचिकी लिपि के माध्यम से संताली भाषा का अक्षर ज्ञान, अंकगणित, साहित्य एवं सांस्कृतिक शिक्षा प्रदान की गई। इस अभियान का उद्देश्य केवल भाषा शिक्षण तक सीमित नहीं रहा बल्कि बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना तथा मातृभाषा के प्रति गर्व और जागरूकता पैदा करना भी रहा।
जिला स्तर पर व्यापक भागीदारी, कई प्रखंडों में सक्रिय संचालन
संताली समर कैंप को क्षेत्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली। जिला-वार केंद्रों का विवरण इस प्रकार रहा—
पूर्वी सिंहभूम जिले में कुल केंद्र:
- - बहरागोड़ा – 56
- - चाकुलिया – 48
- - घाटशिला – 34
- - मुसाबनी – 21
- - धालभूमगढ़ – 24
- - गुड़ाबांदा – 38
- - डूमरिया – 36
- - पोटका – 26
- सरायकेला-खरसावां – 38 केंद्र
- जामताड़ा – 20 केंद्र
इन केंद्रों में स्थानीय शिक्षकों एवं स्वयंसेवकों ने समर्पण के साथ बच्चों को शिक्षा प्रदान की। आयोजन समिति ने इसे सामुदायिक सहयोग और भाषा जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
मुख्य अतिथि विधायक संजीव सरदार ने दिया सहयोग का भरोसा
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पोटका विधायक संजीव सरदार ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि संताली भाषा, ओलचिकी लिपि और संताल संस्कृति को जीवित रखने में ऐसे समर कैंपों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं का संरक्षण केवल सांस्कृतिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ विषय है। विधायक ने घोषणा की कि वे संताली शिक्षा, समर कैंप और ओलचिकी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए व्यक्तिगत स्तर पर हर संभव सहयोग करेंगे। उन्होंने अगले वर्ष इस अभियान को और बड़े स्तर पर आयोजित करने तथा अधिक संख्या में केंद्र स्थापित करने के लिए पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।
जनजातीय भाषाओं को मजबूत करने के लिए सरकार स्तर पर पहल का आश्वासन
अपने संबोधन में विधायक संजीव सरदार ने कहा कि वे जनजातीय भाषाओं में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मुद्दे को विधानसभा एवं सरकारी मंचों पर मजबूती से उठाया जाएगा ताकि राज्य स्तर पर ठोस नीतिगत निर्णय लिए जा सकें। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों की बौद्धिक क्षमता और सांस्कृतिक पहचान दोनों को सशक्त बनाती है तथा इसे नीति स्तर पर बढ़ावा मिलना चाहिए।
डॉ. सत्यनारायण मुर्मू ने किया पुस्तिकाओं का दान, अगले वर्ष बड़ी घोषणा
कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ. सत्यनारायण मुर्मू ने समर कैंप के लिए एक हजार अलचिकि अक्षर ज्ञान पुस्तिकाएं दान कीं। साथ ही उन्होंने अगले वर्ष पांच हजार पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की घोषणा कर अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की। समारोह में साहित्य अकादमी सम्मानित भुजंग टुडू, होलोंग गाडा पत्रिका के संपादक मोहन चंद बास्के, फागुन पत्रिका के संपादक मागात मुर्मू, मानिक हांसदा, दुखू सोरेन तथा प्रो. बिरेन मांडी सहित कई विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति रही। समारोह की अध्यक्षता देश परगना बैजु मुर्मू (धाड़ दिशोम) ने की जबकि संचालन डॉ. रजनीकांत माण्डी ने किया।
भाषा और संस्कृति संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल
समापन समारोह में सभी केंद्रों के शिक्षकों एवं प्रखंड समन्वयकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि संताली भाषा और ओलचिकी लिपि केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि संताल समाज की सांस्कृतिक पहचान हैं। आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान को और मजबूत बनाने तथा बच्चों को मातृभाषा शिक्षा से जोड़ने की अपील की। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. फुदान चंद्र सोरेन, छोटा भुजंग टुडू, सुधीर चंद्र सोरेन, हाराधन मुर्मू, डुमका मुर्मू, सालखू मांडी और रामचंद्र हांसदा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Social Plugin