डुंगरीटोला में ग्रामसभा का आयोजन, ग्रामीणों में भारी आक्रोश। ग्रामसभा ने कहा- गांव में गलत काम करने वालों को बरदाश्त नहीं किया जायेगा।

Jamshedpur News : जमशेदपुर के बारीगोड़ा डुंगरीटोला में शनिवार को एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा का आयोजन किया गया। ग्रामसभा की अध्यक्षता माझी बाबा रमेश मुर्मू ने की। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और रैयती जमीन पर कथित रूप से असामाजिक तत्वों द्वारा की जा रही घेराबंदी का विरोध किया गया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि गांव की पारंपरिक व्यवस्था और आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामसभा में यह निर्णय लिया गया कि जिन लोगों ने जमीन पर चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू कराया है, वे 24 घंटे के भीतर सभी निर्माण सामग्री और घेराबंदी को हटा लें। अन्यथा रविवार को ग्रामसभा स्वयं चहारदीवारी तोड़ने के लिए बाध्य होगी।

नंदो भूमिज की रैयती जमीन पर घेराबंदी का आरोप

ग्रामसभा में बताया गया कि डुंगरीटोला निवासी नंदो भूमिज की रैयती जमीन पर पिछले तीन दिनों से चहारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन खाता संख्या-179 तथा प्लॉट संख्या-4 और 5 में दर्ज है। माझी बाबा रमेश मुर्मू ने कहा कि यह जमीन पूरी तरह से नंदो भूमिज की निजी रैयती जमीन है और बिना ग्रामसभा की जानकारी एवं सहमति के किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा निर्माण कार्य कराया जाना संदेह पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व गांव की व्यवस्था को चुनौती देते हुए जबरन जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।


ग्रामसभा ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि चहारदीवारी निर्माण में लगे सभी सामानों को 24 घंटे के अंदर हटाया जाए। ग्रामसभा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण खुद मौके पर पहुंचकर घेराबंदी को ध्वस्त करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में किसी भी निर्माण कार्य से पहले ग्रामसभा को जानकारी देना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में चोरी-छिपे निर्माण कराया जा रहा था, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामसभा के इस फैसले के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। 

परसुडीह थाना और अंचल कार्यालय को दी गई सूचना 

ग्रामसभा के निर्णय के बाद पूरे मामले की जानकारी परसुडीह थाना को लिखित रूप से दे दी गई है। इसके अलावा जमशेदपुर अंचल कार्यालय को भी इस विवाद से अवगत कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि किसी प्रकार का विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। ग्रामसभा ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन के वास्तविक मालिक के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और अवैध कब्जे की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की जाए।


आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था का हवाला

माझी बाबा रमेश मुर्मू ने ग्रामसभा में कहा कि आदिवासी समाज में ग्रामसभा सर्वोच्च होती है और गांव की पारंपरिक व्यवस्था के तहत सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि गांव में बाहरी या असामाजिक तत्वों की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जमीन संबंधी विवाद पैदा करता है या ग्रामसभा को नजरअंदाज कर निर्माण कार्य करता है तो यह गांव की सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। ग्रामीणों ने भी कहा कि वे अपनी परंपरा, संस्कृति और जमीन की रक्षा के लिए हमेशा एकजुट रहेंगे।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

चहारदीवारी निर्माण को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी गई। ग्रामसभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की जमीन का मामला नहीं है, बल्कि पूरे गांव की एकता और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग दबंगई दिखाकर जमीन कब्जाने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गांव के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामसभा में महिलाओं और बुजुर्गों ने भी खुलकर अपनी बात रखी और जमीन की सुरक्षा की मांग की।


जमीन विवाद को लेकर बढ़ सकती है प्रशासनिक चुनौती

बारीगोड़ा डुंगरीटोला का यह मामला अब प्रशासन के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ ग्रामसभा अपने अधिकारों और परंपरागत व्यवस्था का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन पर निर्माण कार्य कराने वाले लोगों की पहचान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता है तो विवाद और बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन संबंधी मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।

गलत काम को ग्रामसभा कभी बरदाश्त नहीं करेगा 

ग्रामसभा में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन और गांव की एकता को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देंगे। नंदो भूमिज की जमीन पर हो रही घेराबंदी को ग्रामीणों ने अन्यायपूर्ण बताते हुए सामूहिक विरोध का फैसला लिया है।गांव के लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज में जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि अस्तित्व और पहचान का प्रतीक है। इसलिए किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामसभा ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।