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राजेश मार्डी की कहानी: 80 बार रक्तदान कर कोल्हान में रचा इतिहास

Jamshedpur News: खून का कोई धर्म नहीं होता, कोई जात नहीं होती और न ही इसकी कोई फैक्ट्री होती है। यह सिर्फ एक इंसान के दिल से निकलकर दूसरे इंसान की में बहता है और जिंदगी को नया देता है। लौहनगरी जमशेदपुर की गलियों से लेकर कोल्हान के दूर-दराज ग्रामीण अंचलों तक, आज एक नाम बेहद आदर के साथ लिया जाता राजेश मार्डी। जिन्हें लोग प्यार और सम्मान से ब्लड कहते हैं। जब देश 14 जून को रक्तदाता मना रहा है, तब राजेश की कहानी हम सबके भीतर छिपे इंसान को जगाने का काम करती है। वे कोल्हान प्रमंडल के पहले ऐसे आदिवासी चेहरे हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड 80 बार रक्तदान कर मानवता की एक अनूठी मिसाल कायम की है।

जब एक संकल्प ने बदला जीवन का रास्ता

राजेश की यह यात्रा महज एक नहीं, बल्कि समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता का परिणाम है। एक साधारण निजी कंपनी में काम करने वाले राजेश ने जब पहली बार किसी हुए मरीज के लिए रक्तदान किया था, तब उन्हें अहसास हुआ कि सुई की एक मामूली चुभन किसी के हुए घर के चिराग को दोबारा रोशन कर सकती है। बस, उसी दिन से उन्होंने रुकना नहीं सीखा। नौकरी की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने अपने जीवन का सबसे मिशन को बना लिया। 80 बार रक्तदान करना कोई छोटी बात नहीं इसके लिए अटूट इच्छाशक्ति, सेहत के प्रति जागरूकता और दूसरों के दर्द को अपना समझने वाले विशाल दिल की जरूरत होती है।

ग्रामीण युवाओं के और मार्गदर्शक

जमशेदपुर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी जागरूकता की कमी के कारण लोग रक्तदान करने से कतराते हैं। ऐसे में राजेश इन क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक ढाल बनकर हुए हैं। जब भी किसी सुदूर गांव में किसी दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी के कारण खून की आपातकालीन जरूरत होती है, तो लोगों के फोन की घंटी सीधे राजेश के पास बजती है। विकट से विकट परिस्थितियों में भी वे कभी पीछे नहीं हटते। वे न केवल खुद हैं, बल्कि पलक झपकते ही रक्त की व्यवस्था करा देते हैं। यही वजह है कि कोल्हान की युवा पीढ़ी उन्हें अपना सबसे हमदर्द और संकटमोचक मानती है।

डर को मुस्कान में बदलने का हुनर

अक्सर देखा जाता है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे-साधे लोग पहली बार शहर के ब्लड सेंटर आते हैं, तो वे अंदर के माहौल, डॉक्टरों और सुइयों को देखकर बुरी तरह घबरा जाते हैं। राजेश का असली जादू यहीं देखने को मिलता है। वे स्वैच्छिक रक्तदाता संघ के साथ मिलकर जमशेदपुर ब्लड सेंटर में अपनी निस्वार्थ सेवाएं देते हैं। जब कोई डरा हुआ नया व्यक्ति वहां पहुंचता है, तो राजेश उसे एक दोस्त की तरह गले लगाते हैं। वे बेहद सरल भाषा में रक्तदान की बारीकियों को समझाते हैं, उसके मन के अंधविश्वास और डर को दूर करते हैं। उनकी बातों में ऐसा सम्मोहन और अपनत्व होता है कि सामने वाला हंसते-हंसते रक्तदान करने के लिए तैयार हो जाता है।

नए रक्तदाताओं के सच्चे सारथी

राजेश का काम सिर्फ किसी को रक्तदान के लिए तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहता। जब कोई नया युवा पहली बार बेड पर लेटता है और उसके हाथ में सुई चुभाई जाती है, तब राजेश एक साए की तरह उसके पीछे हो जाते हैं। वे उसका हाथ थामते हैं, उसका हौसला बढ़ाते हैं और चेहरे पर मुस्कान बिखेरते नजर आते हैं। वे जानते हैं कि पहली बार का यह अनुभव उस युवा के पूरे जीवन की सोच बदल सकता है। उनके इसी अपनेपन की बदौलत आज कोल्हान में नए और युवा रक्तदाताओं की एक पूरी फौज हो गई है, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए खून बहाने को तैयार रहती है।

विश्व रक्तदाता दिवस पर एक पुकार

राजेश आज केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक जलती हुई मशाल हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज सेवा के लिए होना जरूरी नहीं, बल्कि आपके पास एक संवेदनशील दिल होना चाहिए। 14 जून का यह विशेष दिन हमसे सवाल करता है कि क्या हम भी किसी की ढलती सांसों को नया जीवन दे सकते आइए, इस विश्व रक्तदाता दिवस पर ब्लड राजेश के जीवन से प्रेरणा लें। डर को पीछे छोड़ें, आगे आएं और नियमित रक्तदान का संकल्प लें। क्योंकि आपका दिया हुआ सा रक्त, किसी की पूरी दुनिया होने से बचा सकता है। 

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