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Jamshedpur News : देव कृष्ण सुमन ने बुंडू की मिट्टी से वैश्विक मंच तक का किया सफर

 Jamshedpur News : झारखंड के रांची जिले के बुंडू प्रखंड का एक छोटा सा गाँव 'गोसाइडीह'। यहाँ की पगडंडियों से निकलकर 23 वर्षीय देव कृष्ण सुमन ने हांगकांग की गगनचुंबी इमारतों तक का सफर तय किया है। यह कहानी केवल एक नौकरी की नहीं, बल्कि एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार के बेटे के उस असाधारण संकल्प की है, जिसने सीमाओं को लांघकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। देव कृष्ण सुमन की यह कहानी वाकई प्रेरणादायक है। एक छोटे से गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर चमकना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है।




देव के व्यक्तित्व की चमक उनके घर से शुरू हुई

देव के व्यक्तित्व की चमक उनके घर से शुरू हुई। पिता बुधेश्वर गोराई ने शिक्षक और किसान के रूप में पसीना बहाया, तो माता शोभा देवी ने सिलाई मशीन की गूंज के बीच परिवार की उम्मीदों को सींचा। सीमित संसाधनों के बावजूद देव ने अनुशासन और मेहनत का पाठ अपने पिता से सीखा। यही कारण था कि 2018 में झारखंड बोर्ड की मेरिट लिस्ट में टॉप 10 में आकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का पहला प्रमाण दिया।


'गुरु' बनकर खुद की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया

उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक तंगी आई, तो देव रुके नहीं। सेंट जेवियर्स इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने खुद शिक्षक की भूमिका निभाई। 30-30 छात्रों के दो बैच पढ़ाकर उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई का खर्च निकाला, बल्कि खुद के भीतर नेतृत्व और आत्मविश्वास के बीज भी बोए। यह उनके जीवन का वह दौर था जिसने उन्हें सिखाया कि आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ी ताकत है।

आईटीआई तमाड़ में सपनों को मिली तकनीकी धार

वर्ष 2020 देव के जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित 'आईटीआई तमाड़' में टर्नर ट्रेड में उनका नामांकन हुआ। कोविड-19 की चुनौतियों के बीच भी देव की लगन कम नहीं हुई। ऑनलाइन क्लास हो या ऑफलाइन, उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति और सीखने की भूख ने उन्हें संस्थान के सबसे होनहार प्रशिक्षुओं की कतार में खड़ा कर दिया।

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खुद को केवल 'काम' तक सीमित नहीं रखा

कैंपस प्लेसमेंट के जरिए सीटीसी इंडिया से शुरू हुआ सफर आरकेएफएल तक पहुंचा। देव ने खुद को केवल 'काम' तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सीएनसी प्रोग्रामिंग से लेकर टर्निंग, ग्राइंडिंग और वीएमसी जैसी जटिल मशीनी प्रक्रियाओं में महारत हासिल की। उनका मंत्र साफ था—"सिर्फ ड्यूटी करना काफी नहीं, हर दिन कुछ नया सीखना ही आगे बढ़ाएगा।"

बुंडू के 'हुनर' का हांगकांग में डंका, मिला 2 लाख का पैकेज

वर्ष 2025 में टाटा स्टील टेक्निकल इंस्टीट्यूट (TSTI) के माध्यम से हांगकांग की कंपनी 'वी एस सी कंस्ट्रक्शन स्टील सोलूशन्स लिमिटेड' के लिए इंटरव्यू का बुलावा आया। पद केवल एक था और दावेदार कई। देव ने अपनी तकनीकी कुशलता और आत्मविश्वास के दम पर उस एकमात्र सीट को हासिल कर लिया। 2026 में उनकी नियुक्ति ₹2.08 लाख प्रतिमाह के शानदार वेतन पर हुई।


अपनी सफलता से पिता बुधेश्वर का बढ़ाया मान

देव की सफलता पर पिता बुधेश्वर भावुक हैं। वे कहते हैं, "हांगकांग तक पहुँचना हमारे लिए सपने जैसा था, लेकिन देव की ईमानदारी ने इसे सच कर दिया।" आईटीआई तमाड़ के लिए भी यह गौरव का क्षण है, क्योंकि देव इस संस्थान के 38वें ऐसे प्रशिक्षु हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाएं देंगे। प्राचार्य विशाल आनंद के अनुसार, देव जैसे युवा वैश्विक बाजार में भारतीय हुनर की विश्वसनीयता बढ़ा रहे हैं।

सामाजिक परिवर्तन का नया 'रोल मॉडल'

टाटा स्टील फाउंडेशन के स्किल डेवलपमेंट हेड, कैप्टन अमिताभ का मानना है कि देव की यात्रा एक बड़े बदलाव का संकेत है। जब छोटे गांवों के युवा वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाते हैं, तो वे अपने पीछे आने वाली पूरी पीढ़ी को बड़े सपने देखने का हौसला देते हैं। देव कृष्ण सुमन की कहानी साबित करती है कि यदि हुनर को सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो सफलता के लिए आसमान भी छोटा पड़ जाता है।

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