जमशेदपुर में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए टाटा स्टील ने इस वर्ष का विश्व पर्यावरण दिवस बेहद अनूठे और प्रभावी ढंग से मनाया। कंपनी ने अपनी विभिन्न परिचालन इकाइयों में #NowForClimate थीम के तहत एक व्यापक सामूहिक वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्टील सिटी जमशेदपुर की हरित छत्रछाया (ग्रीन कवर) का विस्तार करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित बनाना है। इस विशेष पहल में न केवल टाटा स्टील के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, बल्कि राज्य प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की, जो सामूहिक संकल्प की एक मजबूत मिसाल है।
#NowForClimate: जलवायु कार्रवाई के लिए टाटा स्टील का बड़ा संकल्प
जलवायु परिवर्तन आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। टाटा स्टील ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने #NowForClimate अभियान को धरातल पर उतारा है। यह अभियान केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भविष्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक प्रथाओं को अपनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक रोडमैप है। कंपनी का मानना है कि औद्योगिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। इस अभियान के जरिए कर्मचारियों और आम जनता को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ खड़े होने और तत्काल कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
संयुक्त नेतृत्व: वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य प्रशासन की अनुकरणीय भागीदारी
इस व्यापक वृक्षारोपण अभियान की सफलता का मुख्य श्रेय इसके मजबूत और साझा नेतृत्व को जाता है। अभियान का नेतृत्व टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल, वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस–डाउनस्ट्रीम) उज्ज्वल चक्रवर्ती और टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टीएसयूआईएसएल) के प्रबंध निदेशक ए. के. भटनागर ने संयुक्त रूप से किया। इन वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं ने स्वयं पौधे लगाकर समाज और उद्योग जगत को पर्यावरण संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश दिया।
नियामक साझेदारी: जेएसपीसीबी और वन विभाग का मिला मजबूत सहयोग
टाटा स्टील का यह अभियान सरकारी नियामक संस्थाओं और समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण बना। इस कार्यक्रम में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें क्षेत्रीय पदाधिकारी जितेंद्र प्रसाद सिंह, अनिल सक्सेना और कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता आफताब आलम शामिल थे। इसके साथ ही, वन विभाग की ओर से प्रभागीय वन पदाधिकारी (डीएफओ) शबा आलम अंसारी और क्षेत्रीय वन कार्यालय के अन्य प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में शामिल होकर अपनी तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञता साझा की।
जैव विविधता का संरक्षण: 1,500 से अधिक देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण था। टीएसयूआईएसएल की हॉर्टिकल्चर टीम और टाटा स्टील की सेंट्रल एनवायरनमेंट मैनेजमेंट टीम के मार्गदर्शन में जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगभग 1,500 पौधे लगाए गए।
विशेष नोट: इस अभियान में केवल देशी प्रजातियों (Native Species) के पौधों का ही चयन किया गया। यह चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देशी पौधे स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करने, मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता में सुधार लाने और स्थानीय पक्षियों व कीटों को प्राकृतिक आवास प्रदान करने में सबसे अधिक सहायक होते हैं।
सामुदायिक सहभागिता: नागरिकों को पर्यावरण से जोड़ने के लिए 800 मुफ्त पौधों का वितरण
किसी भी शहर को हरा-भरा बनाने के लिए वहां के नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी सोच के साथ टाटा स्टील ने जमशेदपुर के नागरिकों के बीच लगभग 800 पौधों का निःशुल्क वितरण किया। इस सामुदायिक पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों के भीतर अपने आसपास के पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को जगाना था। मुफ्त पौधे पाकर नागरिकों ने भी यह संकल्प लिया कि वे न केवल इन पौधों को लगाएंगे बल्कि एक अभिभावक की तरह इनकी देखभाल भी करेंगे, जिससे शहर की हरित छत्रछाया को और मजबूती मिलेगी।
सतत जीवनशैली का संकल्प: कर्मचारियों की भागीदारी और कार्बन कटौती की शपथ
टाटा स्टील की विभिन्न परिचालन इकाइयों के कर्मचारियों ने इस पूरे कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पर्यावरण के प्रति अपने उत्साह का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का समापन एक बेहद भावुक और जिम्मेदार क्षण के साथ हुआ, जहां उपस्थित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने सामूहिक रूप से एक विशेष शपथ ली।
सतत जीवनशैली: सभी प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल और सतत आदतों को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्बन फुटप्रिंट में कमी: भविष्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने वाली तकनीकों और जीवनशैली का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई।
संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग: पानी और ऊर्जा जैसी प्राकृतिक संपदाओं को बचाने का वादा किया।

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