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Rasca Film festival: देशभर से पहुंच रही संताली फिल्म, शहर में होगा सिने कलाकारों का जमावड़ा

Jamshedpur News: जमशेदपुर की सांस्कृतिक धरा एक बार फिर मांदर की थाप और बड़े पर्दे के जादू से सराबोर होने को तैयार है। संताली सिनेमा के 'ऑस्कर' माने जाने वाले 14वें नेशनल संताली फिल्म रास्का फेस्टिवल 2026 का बिगुल फूंक दिया गया है। आगामी 1 मई से 9 मई तक शहर के विभिन्न कोनों में संताली कला और फिल्मों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। रास्का के निदेशक शंकर हेंब्रम ने इस भव्य आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस बार का फेस्टिवल न केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित रहेगा, बल्कि यह झारखंड, बंगाल और ओडिशा की साझा संस्कृति का एक विराट उत्सव बनेगा।

संताली सिनेमा का महाकुंभ: रास्का फेस्टिवल 2026


जमशेदपुर में रास्का फिल्म फेस्टिवल केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं, बल्कि संताली भाषा और पहचान का गौरव बन चुका है। इस 14वें संस्करण को लेकर सिने प्रेमियों में भारी उत्साह है। यह आयोजन 1 मई से शुरू होकर 9 मई तक चलेगा, जिसमें बेहतरीन पटकथा, निर्देशन और अभिनय का प्रदर्शन करने वाली फिल्मों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। यह आयोजन संताली फिल्म उद्योग (संताली सिनेमा) को एक नई दिशा और वैश्विक मंच प्रदान करने का संकल्प है।

गुरु गोमके के जन्मदिन से 'जूरी स्क्रीनिंग' का आगाज


उत्सव की शुरुआत बेहद खास दिन से हो रही है। 1 मई को गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के जन्म दिवस के अवसर पर करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान सभागार में जूरी स्क्रीनिंग का शुभारंभ होगा। 4 मई तक चलने वाली इस प्रक्रिया में विशेषज्ञ जूरी मेंबर हर फिल्म की बारीकियों को परखेंगे। कैमरा एंगल से लेकर संवाद अदायगी तक, हर पहलू की जांच होगी ताकि सबसे योग्य कलाकार और फिल्म को ही जीत का सेहरा मिले।

नामांकन की खिड़की: 1 से 25 अप्रैल तक का समय


अगर आप एक फिल्मकार हैं और आपकी फिल्म संताली भाषा में है, तो अपनी प्रविष्टियां तैयार कर लें। निदेशक शंकर हेंब्रम ने जानकारी दी है कि फिल्मों का नामांकन 1 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच लिया जाएगा। ध्यान रहे, केवल वही फिल्में इस रेस का हिस्सा बन पाएंगी जो इस निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेंगी। यह फिल्मकारों के लिए अपनी प्रतिभा को विशेषज्ञों के सामने पेश करने का सुनहरा मौका है।

पब्लिक स्क्रीनिंग: जब दर्शकों के बीच पहुंचेगा सिनेमा


फिल्में आखिर दर्शकों के लिए ही बनती हैं, और रास्का इसे बखूबी समझता है। 5 मई को बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में चयनित फिल्मों की 'पब्लिक स्क्रीनिंग' रखी गई है। यह वह दिन होगा जब आम नागरिक, छात्र और फिल्म प्रेमी बड़े पर्दे पर अपनी भाषा और संस्कृति की कहानियों को देख सकेंगे। यह स्क्रीनिंग दर्शकों और फिल्मकारों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक शानदार जरिया बनेगी।

तीन राज्यों का 'सांस्कृतिक कोलाज'


इस बार का फेस्टिवल केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। इसमें झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के जाने-माने सिने कलाकार एक ही मंच पर नजर आएंगे। इन तीन राज्यों की समृद्ध जनजातीय परंपरा और आधुनिक कला का संगम इस समारोह को 'सतरंगा' बना देगा। जब अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकार अपनी प्रतिभा साझा करेंगे, तो यह दृश्य वास्तव में देखने लायक होगा।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच


रास्का का हमेशा से यह उद्देश्य रहा है कि बड़े सितारों के साथ-साथ जमीनी स्तर के स्थानीय कलाकारों को भी पहचान मिले। इस वर्ष भी स्थानीय नृत्य दल, गायक और थिएटर कलाकार मंच साझा करेंगे। बड़े पर्दे के सितारों के साथ अपनी प्रस्तुति देना इन उभरते कलाकारों के लिए एक बड़ा 'करियर ब्रेक' और प्रेरणा का स्रोत साबित होगा।

9 मई का 'ग्रांड फिनाले': पुरस्कारों की बौछार


पूरे उत्सव का चरम 9 मई की शाम को होगा। बिष्टुपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में एक भव्य और रंगारंग 'अवार्ड नाइट' का आयोजन किया जाएगा। इस शाम बेस्ट फिल्म, बेस्ट एक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस, बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट प्रोड्यूसर जैसी प्रतिष्ठित श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। विजेताओं के नामों की घोषणा के साथ ही होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम इस शाम को जमशेदपुर की यादों में हमेशा के लिए दर्ज कर देंगे।

संताली भाषा और सिनेमा के भविष्य की राह


यह फेस्टिवल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संताली भाषा के संरक्षण की एक मुहिम भी है। फिल्मों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ रही है। रास्का जैसे आयोजन यह साबित करते हैं कि यदि सही मंच मिले, तो क्षेत्रीय सिनेमा भी तकनीक और कला के मामले में किसी से पीछे नहीं है। 1 से 9 मई तक जमशेदपुर न केवल लौहनगरी होगी, बल्कि यह 'संताली फिल्म नगरी' के रूप में अपनी चमक बिखेरेगी।

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