Viral News: 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल में रहस्य और रोमांच का तड़का लग गया है। उड़ीसा के प्रसिद्ध संत श्री वीरो भद्रो बोदरा जी, जिन्हें आम लोग “उड़ीसा बाबा” के नाम से जानते हैं, ने एक बड़ी भविष्यवाणी कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनेगी और ममता बनर्जी दोबारा मुख्यमंत्री पद संभालेंगी। वहीं असम में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए खाता खोलने में सफल होगा।


महायज्ञ के बाद आई बाबा की भविष्यवाणी

बताया जा रहा है कि उड़ीसा में विशेष पूजा-पाठ और महायज्ञ के समापन के बाद उड़ीसा बाबा ने यह भविष्यवाणी की। उनके अनुयायियों का कहना है कि बाबा की भविष्यवाणियां अक्सर सटीक साबित होती रही हैं। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों के परिणामों को लेकर संकेत दिए, जिनमें बंगाल और असम प्रमुख रहे।


2019 की भविष्यवाणी बनी थी सच

उड़ीसा बाबा का नाम पहली बार तब चर्चा में आया था जब उन्होंने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने की भविष्यवाणी की थी। उस समय भी कई लोगों ने इसे महज संयोग माना था, लेकिन जब परिणाम आए तो उनकी बात सच साबित हुई। इसी वजह से अब उनकी नई भविष्यवाणी को लेकर लोगों में खासा उत्साह और जिज्ञासा देखी जा रही है।

बंगाल में फिर ममता का जलवा?

बाबा के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी। ममता बनर्जी, जो पहले से ही राज्य की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं, उनके नेतृत्व में पार्टी फिर से जनता का विश्वास जीतने में सफल होगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी ममता बनर्जी का तेवर काफी आक्रामक और आत्मविश्वास से भरा रहा है, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है।


असम में झामुमो की नई पारी

इस भविष्यवाणी का दूसरा बड़ा पहलू असम से जुड़ा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा, जो अब तक मुख्य रूप से झारखंड की राजनीति तक सीमित रही है, पहली बार असम में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बाबा का कहना है कि पार्टी इस बार अपना खाता खोलने में सफल होगी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने भी असम में जमकर प्रचार किया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।

सोशल मीडिया पर छाया मुद्दा

उड़ीसा बाबा की इस भविष्यवाणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग इस विषय पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे आस्था और विश्वास से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे महज एक संयोग मान रहे हैं। वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी माहौल में मनोवैज्ञानिक प्रभाव के रूप में भी देख रहे हैं।


जनता में उत्सुकता, किसकी बनेगी सरकार?

चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, जनता के बीच उत्सुकता बढ़ती जा रही है। हर पार्टी अपने-अपने आंकड़ों और समीकरणों के आधार पर जीत का दावा कर रही है। समर्थक अपने स्तर पर जोड़-घटाव में लगे हैं और यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर सत्ता किसके हाथ में जाएगी। ऐसे में उड़ीसा बाबा की भविष्यवाणी ने इस राजनीतिक मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
कुल मिलाकर, जहां एक ओर यह भविष्यवाणी आस्था और विश्वास का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर इसने चुनावी माहौल को और अधिक रोमांचक बना दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले चुनाव परिणाम बाबा की बातों को कितना सही साबित करते हैं।