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आदिवासी सेंगेल अभियान ने प्रेमशिला मुर्मू का किया समर्थन, कुप्रथा खत्म कर समाज को प्रगतिशील बनाने पर जोर

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बागबेड़ा-मतलाडीह स्थित सेंगेल जुमिद थान में रविवार को आदिवासी सेंगेल अभियान की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन ने की। इस दौरान पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड अंतर्गत राघोई गांव की महिला प्रेमशिला मुर्मू से जुड़े मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने प्रेमशिला मुर्मू के पक्ष में समर्थन व्यक्त करते हुए उनके कदम को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में समाज के विभिन्न प्रतिनिधि एवं ग्रामीण शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था, वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और बदलते समय के अनुसार सामाजिक सुधार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। बैठक में जूनियर मुर्मू, कुनूराम बास्के, सीताराम माझी, अर्जुन मुर्मू, भगीरथी मुर्मू और मार्शल टुडू सहित कई लोग उपस्थित रहे।

प्रेमशिला मुर्मू के साहसिक कदम को बताया बदलाव की शुरुआत
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रेमशिला मुर्मू ने सामाजिक परंपराओं से जुड़े उस विषय को सामने लाया है जिस पर लंबे समय से चर्चा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सेंगेल अभियान के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब वह समय के अनुसार अपने सामाजिक व्यवहार और सोच में सकारात्मक बदलाव लाए। बैठक में यह कहा गया कि महिलाओं की भागीदारी समाज के हर क्षेत्र में बढ़ रही है और ऐसे में परंपराओं और सामाजिक नियमों की समीक्षा भी समय-समय पर जरूरी है। प्रेमशिला मुर्मू के मामले को इसी संदर्भ में देखा गया और इसे सामाजिक संवाद का विषय बताया गया। 

महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं पर उठे सवाल
बैठक को संबोधित करते हुए सोनाराम सोरेन ने कहा कि आदिवासी संताल समाज की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को छत पर चढ़कर खपरैल या पुस के घर छाने की अनुमति नहीं दी जाती रही है। इसके पीछे लंबे समय से मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक धारणाओं को कारण माना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व समय में समाज के कई हिस्सों में मासिक धर्म को अपवित्रता से जोड़कर देखा जाता था, जिसके आधार पर महिलाओं पर कई प्रकार की सामाजिक सीमाएं लागू की गईं। इसी सोच के कारण कुछ पारंपरिक पूजा स्थलों, विशेषकर जाहेरथान में महिलाओं के प्रवेश को भी सीमित किया गया। हालांकि उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, जागरूकता और वैज्ञानिक सोच के विस्तार के साथ समाज में इन विषयों पर नए दृष्टिकोण विकसित हो रहे हैं।

कुप्रथाओं को समाप्त कर वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील
सोनाराम सोरेन ने कहा कि समाज की उन्नति के लिए उन कुप्रथाओं को समाप्त करना आवश्यक है जो सामाजिक विकास में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि आज देश और दुनिया के अनेक समाज बाल विवाह, सामाजिक भेदभाव और अन्य पुरानी कुप्रथाओं से बाहर निकलकर समानता और प्रगतिशील सोच की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। उनका कहना था कि सामाजिक परंपराओं का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन उन पर चर्चा और आवश्यक सुधार भी समाज की प्रगति का हिस्सा होना चाहिए।

प्रेमशिला मुर्मू बैठक में शामिल होने से किया इनकार
इधर पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा थाना क्षेत्र अंतर्गत राघोई गांव में रविवार को इस मामले को लेकर विभिन्न गांवों के ग्रामीणों की बैठक होने की सूचना सामने आई। बताया गया कि बैठक में प्रेमशिला मुर्मू को खपरैल घर छाने के मामले में दंडित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।
ग्रामीणों की ओर से प्रेमशिला मुर्मू को बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया। हालांकि उन्होंने बैठक में जाने से इनकार करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में उन्हें गांव से बहिष्कृत किया जा चुका है, इसलिए अब उस बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद प्रेमशिला मुर्मू सोनुवा थाना पहुंचीं, जहां प्रशासन की ओर से बातचीत और स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया।

पुलिस प्रशासन की सक्रियता से टला विवाद
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय रहा। जानकारी के अनुसार, सोनुवा थाना में कुछ लोगों को बातचीत के लिए बुलाया गया ताकि किसी भी संभावित विवाद को बढ़ने से रोका जा सके। शाम के समय कुछ ग्रामीण थाना पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी कि गांव में प्रेमशिला मुर्मू से संबंधित किसी प्रकार की औपचारिक बैठक नहीं बुलाई गई थी। प्रशासन की तत्परता और संवाद के प्रयासों के कारण मामला आगे बढ़ने से बच गया।

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