https://omg10.com/4/11146156 काशीडीह टोला को राजस्व गांव घोषित करने की उठी मांग: विकास की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का ग्राम सभा में प्रदर्शन
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काशीडीह टोला को राजस्व गांव घोषित करने की उठी मांग: विकास की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का ग्राम सभा में प्रदर्शन

काशीडीह टोला में ग्राम सभा कर ग्रामीणों ने उठाई अलग राजस्व गांव की मांग
Jamshedpur News: मुसाबनी प्रखंड क्षेत्र के फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत अंतर्गत सोमायडीह गांव के काशीडीह टोला में वर्षों से विकास कार्यों की अनदेखी से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में रविवार को ग्रामीणों ने ग्राम सभा आयोजित कर अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और काशीडीह टोला को अलग कर राजस्व गांव घोषित करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उनका टोला प्रशासनिक और विकासात्मक योजनाओं से लगातार वंचित रह जा रहा है। ग्राम सभा के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि काशीडीह को अलग राजस्व गांव का दर्जा मिलता है तो सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांव तक पहुंचेगा और विकास की गति तेज होगी।

झामुमो नेता बाघराय मार्डी को ग्रामीणों ने सौंपा मांग पत्र
ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने अपनी मांगों से झामुमो नेता बाघ राय मार्डी को अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि काशीडीह टोला लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी झेल रहा है और कई बार संबंधित अधिकारियों तक बात पहुंचाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। इस दौरान बाघ राय मार्डी ने ग्रामीणों की मांग को जायज बताते हुए कहा कि जादूगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत सोमायडीह गांव के अधीन कुल 8 से 10 टोले आते हैं। इतने बड़े क्षेत्र में सभी टोले तक समान रूप से विकास पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित विभाग और प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा ताकि समाधान की दिशा में पहल हो सके।

औद्योगिक क्षेत्र के पास होने के बावजूद रोजगार और सुविधाओं का अभाव
ग्रामीणों का कहना है कि काशीडीह टोला हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड माइंस क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। लोगों का आरोप है कि उद्योग क्षेत्र के पास होने के बावजूद यहां के परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार रोजगार के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में भी गांव को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से पलायन कम होगा और युवाओं को बेहतर भविष्य मिल सकेगा।

राशन और नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष
ग्राम सभा में ग्रामीण मिर्जा सोरेन, विजय बोदरा, रामदास हेंब्रम, सुरेंद्र नाथ मुर्मू तथा काशीडीह टोला प्रधान भीलू राम बेसरा ने बताया कि गांव की सबसे बड़ी समस्याओं में राशन और संचार सुविधा शामिल है। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें लगभग पांच किलोमीटर दूर सूरदा क्रॉसिंग तक जाकर राशन लाना पड़ता है। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी बनी हुई है, जिससे लोगों को सरकारी सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। ग्रामीणों ने कहा कि आज के समय में डिजिटल कनेक्टिविटी एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है, लेकिन काशीडीह अब भी इस सुविधा से पर्याप्त रूप से नहीं जुड़ पाया है।

सीएसआर योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंचने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में संचालित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजनाओं का लाभ काशीडीह टोला तक नहीं पहुंच रहा है। उनका कहना है कि उद्योगों द्वारा आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्य किए जाने चाहिए, लेकिन यहां के लोग अब भी सड़क, रोजगार, शिक्षा और अन्य सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने मांग की कि कंपनी और प्रशासन संयुक्त रूप से क्षेत्र की आवश्यकताओं का सर्वे कर विकास योजनाओं को धरातल पर लागू करें। उनका मानना है कि यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो तो गांव की स्थिति में बड़ा बदलाव संभव है।

130 आदिवासी परिवारों को राजस्व गांव बनने से विकास की उम्मीद
ग्रामीणों के अनुसार काशीडीह टोला में लगभग 130 आदिवासी परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों की मुख्य मांग यही है कि काशीडीह को अलग राजस्व गांव का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक पहचान मिलने के बाद योजनाओं का लाभ सीधे गांव तक पहुंच सके। ग्रामीणों का कहना है कि अलग राजस्व गांव बनने से सड़क, पेयजल, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी। ग्राम सभा में मौजूद लोगों ने प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की और कहा कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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