https://omg10.com/4/11146156 जमशेदपुर में राज्य स्तरीय बुद्धिजीवी सम्मेलन में आदिवासी समाज के भविष्य पर होगा मंथन
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जमशेदपुर में राज्य स्तरीय बुद्धिजीवी सम्मेलन में आदिवासी समाज के भविष्य पर होगा मंथन

सोनारी टीसीसी में 29 जून को आयोजित होगा राज्य स्तरीय बुद्धिजीवी सम्मेलन
Jamshedpur News: सिदो-कान्हू हूल दिवस की पूर्व संध्या पर आदिवासी सुरक्षा परिषद (केंद्रीय समिति) की ओर से 29 जून 2026 को एक दिवसीय राज्य स्तरीय बुद्धिजीवी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य झारखंड के आदिवासी समाज से जुड़े समसामयिक मुद्दों, सामाजिक चुनौतियों तथा भविष्य की दिशा पर गंभीर चर्चा करना है। परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष रमेश हांसदा ने संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि आदिवासी समाज के विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श और नीतिगत सुझाव तैयार करने का मंच बनेगा।

राज्यभर के बुद्धिजीवी और सामाजिक प्रतिनिधि करेंगे शिरकत 
सम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों से आदिवासी समाज के बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा प्रतिनिधि एवं विभिन्न संगठनों के सदस्य भाग लेंगे आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के विचारों को एक मंच पर लाकर भविष्य के लिए सकारात्मक दिशा तय करना है। परिषद का मानना है कि समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान सामूहिक संवाद और जागरूकता से ही संभव है। इसलिए सम्मेलन में सभी प्रतिभागियों को अपने विचार एवं सुझाव रखने का अवसर दिया जाएगा।

परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व रहेगा चर्चा का प्रमुख विषय
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अध्यक्ष रमेश हांसदा ने कहा कि झारखंड में परिसीमन के बाद आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। सम्मेलन में विशेष रूप से इस बात पर विचार किया जाएगा कि आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या किस प्रकार बढ़ाई जा सकती है तथा राजनीतिक भागीदारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व समाज की आवाज को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और इस विषय पर बुद्धिजीवियों के सुझाव भविष्य की दिशा तय करने में उपयोगी होंगे।

शिक्षा, रोजगार और नई पीढ़ी के मुद्दों पर विशेष फोकस
सम्मेलन में युवाओं से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी जाएगी। नई पीढ़ी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर, कौशल विकास तथा सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। आयोजकों का मानना है कि आधुनिक दौर में सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए शिक्षा और रोजगार अत्यंत आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से सम्मेलन में ऐसे सुझावों पर चर्चा होगी जो युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करने में सहायक बन सकें।

आदिवासी पहचान, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक चुनौतियों पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दौरान आदिवासी समाज में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ रहे अंतरजातीय विवाह, सामाजिक बदलाव, पारंपरिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण जैसे विषयों को भी चर्चा में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही आदिवासी समाज के समक्ष उत्पन्न नई सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान पर बुद्धिजीवियों के विचार आमंत्रित किए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि बदलते समय में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

सीएनटी-एसपीटी एक्ट और संवैधानिक अधिकारों पर होगा मंथन
सम्मेलन में आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों से जुड़े विषयों पर भी विशेष चर्चा होगी। विशेष रूप से सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट से संबंधित मुद्दों पर विशेषज्ञों एवं समाज प्रतिनिधियों के विचार साझा किए जाएंगे। आदिवासी सुरक्षा परिषद ने सभी बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों से सम्मेलन में भाग लेकर अपने सुझाव देने की अपील की है। परिषद का मानना है कि समाज के हित में सामूहिक चिंतन और संवाद के माध्यम से ही मजबूत निर्णय लिए जा सकते हैं। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से केंद्रीय अध्यक्ष रमेश हांसदा, महानगर अध्यक्ष राम सिंह मुंडा, प्रकाश सांडील, चुन्नू भूमिज, जुझार समद तथा राजेश सिंह मुंडा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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