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बारीगोड़ा रेलवे ओवरब्रिज की मांग तेज: धरना-प्रदर्शन, टायर जलाकर जताया विरोध

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बारीगोड़ा रेलवे फाटक पर लंबे समय से लंबित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण की मांग को लेकर रविवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में बस्तीवासियों ने रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सड़क पर टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया और जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य दिखाई नहीं दे रहा है। रेलवे फाटक पर रोज लगने वाले जाम और उससे होने वाली परेशानियों से जनता अब पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।

तीन साल पहले हुआ था शिलान्यास, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बारीगोड़ा रेलवे ओवरब्रिज परियोजना का शिलान्यास लगभग तीन वर्ष पहले बड़े समारोह के साथ किया गया था। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि, समय बीतने के बावजूद परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आज तक निर्माण कार्य की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। केवल घोषणाओं और कागजी प्रक्रियाओं के सहारे जनता को इंतजार कराया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे और प्रशासन द्वारा बार-बार निर्माण कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन प्रत्येक बार केवल तारीखें बदलती रहीं और परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

डेढ़ से दो लाख आबादी को झेलनी पड़ रही परेशानी

बारीगोड़ा रेलवे फाटक केवल एक स्थानीय मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु है। क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग डेढ़ से दो लाख लोग आवागमन करते हैं।
फाटक लंबे समय तक बंद रहने के कारण लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यवसायियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। कई बार लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते, जिससे आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि रेलवे ओवरब्रिज बन जाता है तो पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा और लोगों को रोजाना होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

गंभीर मरीजों और एंबुलेंस को भी उठानी पड़ती है मुश्किलें

धरना-प्रदर्शन के दौरान मुखिया सुनीता नाग ने कहा कि ओवरब्रिज नहीं बनने का सबसे गंभीर प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। रेलवे फाटक बंद होने के कारण कई बार एंबुलेंस लंबे समय तक जाम में फंसी रहती हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो जाती है, जिससे उनकी जान तक खतरे में पड़ जाती है। कई बार गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए रेलवे और प्रशासन को इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

आंदोलन में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने साफ कहा कि वर्तमान प्रदर्शन केवल सांकेतिक है। यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मुखिया सुनीता नाग ने कहा कि जनता अब केवल आश्वासन सुनने के लिए तैयार नहीं है। रेलवे और प्रशासन को निर्माण कार्य शुरू करने की स्पष्ट समयसीमा घोषित करनी चाहिए। विधायक प्रतिनिधि मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता ने बारीगोड़ा को लगभग एक टापू में बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी फाइलों में उलझे हुए हैं जबकि आम लोग रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक निर्माण स्थल पर मशीनें और मजदूर काम करते नहीं दिखेंगे, तब तक जनता का आंदोलन जारी रहेगा।

स्थानीय लोगों ने उठाए विकास और जवाबदेही के सवाल

धरना-प्रदर्शन में शामिल विश्वजीत भगत, बसंती भूमिज और बिरजू पात्रो समेत कई स्थानीय लोगों ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि शिलान्यास के बाद काम शुरू न होना जनता के साथ किया गया विश्वासघात है।उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारीगोड़ा रेलवे फाटक की स्थिति उन दावों की वास्तविकता को उजागर करती है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि परियोजना को मंजूरी मिल चुकी थी, तो फिर तीन वर्षों तक काम क्यों नहीं शुरू किया गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन और रेलवे को एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय समस्या का समाधान करना चाहिए।

रेल मंत्रालय ने परियोजना को दी नई गति

इस बीच रेलवे ओवरब्रिज परियोजना को लेकर एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो के प्रयासों से इस परियोजना को नई दिशा मिली है। पहले यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत लागत साझेदारी के मॉडल पर आधारित थी, जिसके कारण विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाएं अटक रही थीं। बाद में रेल मंत्रालय ने इसे पूरी तरह रेलवे की परियोजना के रूप में मंजूरी प्रदान कर दी। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हुई और निर्माण की दिशा में आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी मंजूरियां प्राप्त की गईं।

टेंडर प्रक्रिया पूरी, दुर्गापूजा के बाद शुरू हो सकता है निर्माण

रेलवे सूत्रों के अनुसार टाटानगर और आसनबनी के बीच स्थित फाटक संख्या 137 और 138 पर बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।अधिकारियों का कहना है कि दुर्गापूजा के बाद इस वर्ष के अंत तक निर्माण कार्य शुरू किए जाने की योजना है। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्य शुरू होता है तो बारीगोड़ा और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि इस बार परियोजना केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तव में धरातल पर उतरेगी। वहीं प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे निर्माण कार्य शुरू होने तक इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेंगे।

जनता को अब चाहिए आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए 

बारीगोड़ा रेलवे ओवरब्रिज की मांग अब केवल एक विकास परियोजना का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता के धैर्य, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। वर्षों के इंतजार और अधूरे वादों के बाद लोगों का आक्रोश स्वाभाविक रूप से सामने आया है। अब सभी की निगाहें रेलवे और प्रशासन पर टिकी हैं। यदि दुर्गापूजा के बाद निर्माण कार्य वास्तव में शुरू होता है, तो यह क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर होगी। लेकिन यदि फिर देरी हुई, तो बारीगोड़ा का यह जनआंदोलन और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप ले सकता है।

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