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तालसा सामाजिक बहिष्कार विवाद: 9 जून को ग्रामसभा में होगी प्रशासनिक जांच, ग्रामीणों ने बताया ‘भ्रामक प्रचार’

Jamshedpur News: जमशेदपुर के सुंदरनगर क्षेत्र स्थित तालसा गांव में सामाजिक बहिष्कार के आरोपों को लेकर रविवार को एक महत्वपूर्ण ग्रामस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गांव के माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू ने की। हाल ही में गांव के एक परिवार द्वारा उपायुक्त कार्यालय में सामाजिक बहिष्कार की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी संदर्भ में ग्रामीणों ने एकजुट होकर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की और अपनी बात सामने रखी। बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि गांव की सामाजिक एकता और पारंपरिक व्यवस्था को लेकर गलत संदेश फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ माध्यमों से गांव की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।

माझी बाबा ने सामाजिक बहिष्कार के आरोपों को किया खारिज

बैठक को संबोधित करते हुए माझी बाबा दुर्गाचरण मुर्मू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तालसा गांव में किसी भी परिवार का सामाजिक बहिष्कार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी अध्यक्षता में ऐसी कोई ग्रामसभा आयोजित नहीं हुई, जिसमें किसी परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का निर्णय लिया गया हो। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में जिस प्रकार की खबरें प्रसारित की जा रही हैं, उन्हें देखकर ग्रामीण आश्चर्यचकित हैं। उनके अनुसार, गांव की वास्तविक स्थिति को जाने बिना गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है, जिससे पूरे गांव की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। माझी बाबा ने कहा कि गांव की पारंपरिक व्यवस्था हमेशा न्याय और सामंजस्य के सिद्धांतों पर आधारित रही है तथा किसी भी विवाद का समाधान सामूहिक चर्चा और सहमति से किया जाता है।

ग्रामसभा को बताया विवाद समाधान का पारंपरिक मंच

दुर्गाचरण मुर्मू ने कहा कि ग्रामीण समाज में कभी-कभी आपसी विवाद या मतभेद होना सामान्य बात है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति या परिवार को किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो उसे पहले ग्रामसभा या पारंपरिक व्यवस्था के समक्ष अपनी शिकायत रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा लोकतांत्रिक तरीके से कार्य करती है और यहां सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। गांव में वर्षों से इसी परंपरा के माध्यम से छोटे-बड़े विवादों का समाधान किया जाता रहा है। बैठक में उपस्थित अन्य ग्रामीणों ने भी इस बात का समर्थन किया कि गांव की पारंपरिक संस्थाएं सामाजिक समरसता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और बिना तथ्य जाने किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

यूसिल विस्थापितों की आवाज दबाने की साजिश का आरोप

बैठक के दौरान माझी बाबा ने पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताते हुए गंभीर आशंका व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तालसा गांव लंबे समय से यूसिल (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) से प्रभावित और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहा है।
उनका मानना है कि गांव और उसके नेतृत्व को बदनाम कर प्रभावित परिवारों की आवाज को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन पूरे गांव को गलत तरीके से बदनाम करना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने भी इस बात पर चिंता जताई कि बिना जांच के आरोपों को प्रचारित करने से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और गांव की एकता को नुकसान पहुंच सकता है।

9 जून को प्रशासनिक टीम करेगी जांच और ग्रामीणों से संवाद

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। माझी बाबा ने जानकारी दी कि सामाजिक बहिष्कार संबंधी शिकायत उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने जांच का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त द्वारा गठित विशेष जांच टीम 9 जून को तालसा गांव पहुंचेगी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों के साथ बैठक करेंगे और सभी पक्षों की बात सुनेंगे। जांच टीम पूरे मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास करेगी ताकि सत्य सामने आ सके। ग्रामीणों ने प्रशासनिक जांच का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अफवाहों और वास्तविक तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आएगा। ग्रामीणों ने जांच में पूरा सहयोग देने का भरोसा भी व्यक्त किया।

बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की रही भागीदारी

तालसा गांव में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के कई प्रमुख सामाजिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में नायके बाबा हबीराम मुर्मू, केरवाडुंगरी पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू, वकील हेम्ब्रम, भागवत मार्डी, जितेन हेंब्रम, रामचंद्र टुडू, रघुनाथ टुडू, वार्ड सदस्य सरोती हेंब्रम तथा लक्ष्मी हेम्ब्रम समेत बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी उपस्थित लोगों ने गांव की सामाजिक एकता बनाए रखने तथा सत्य तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक के अंत में ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक जांच के बाद पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी और गांव को लेकर फैल रही भ्रांतियां दूर होंगी।


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