ब्रेकिंग न्यूज़:
फीड लोड हो रही है...

Jamshedpur Land Dispute: जसकनडीह ग्रामसभा ने रैयतदार को दिलाया जमीन पर अधिकार, विवादित भूमि पर लगाया सूचना पट्ट


पेसा कानून के तहत ग्रामसभा ने उठाया महत्वपूर्ण कदम

Jamshedpur News: जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र अंतर्गत जसकनडीह मौजा में स्थित बुलनगोड़ा ग्रामसभा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रैयतदार नंदो भूमिज को उनकी पुश्तैनी जमीन पर अधिकार दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को ग्रामसभा की ओर से विवादित भूमि पर एक सूचना पट्ट (बोर्ड) लगाया गया, जिससे यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भूमि विवाद की जांच ग्रामसभा के स्तर पर की जा चुकी है और संबंधित जमीन पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई उस समय की गई जब पीड़ित रैयतदार नंदो भूमिज ने ग्रामसभा के समक्ष लिखित आवेदन देकर अपनी पुश्तैनी भूमि से जुड़े विवाद में हस्तक्षेप करने तथा न्याय दिलाने की मांग की थी। ग्रामसभा ने पेसा कानून के प्रावधानों के तहत मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू की।

रैयतदार की शिकायत पर दस्तावेजों की हुई गहन जांच

नंदो भूमिज द्वारा प्रस्तुत आवेदन में दावा किया गया था कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर वर्षों से विवाद बना हुआ है और भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी कर उनके अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। शिकायत मिलने के बाद ग्रामसभा ने भूमि से जुड़े सभी उपलब्ध दस्तावेजों, खतियान रिकॉर्ड और सर्वे सेटलमेंट संबंधी अभिलेखों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान ग्रामसभा के प्रतिनिधियों ने न केवल दस्तावेजों का अध्ययन किया बल्कि स्थानीय स्तर पर भूमि की स्थिति का भी सत्यापन किया। इस पूरी प्रक्रिया में पारंपरिक ग्राम व्यवस्था और कानूनी दस्तावेजों दोनों को आधार बनाया गया ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। ग्रामसभा का उद्देश्य केवल विवाद का समाधान करना नहीं था, बल्कि वास्तविक रैयतदार के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना भी था। इसी कारण पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच की गई।

मूल खतियान में आज भी नंदो भूमिज का नाम दर्ज

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया। ग्रामसभा के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और भूमि सर्वे रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित जमीन का मूल खतियान आज भी नंदो भूमिज के नाम पर दर्ज है।
ग्रामसभा ने पाया कि भूमि के स्वामित्व से संबंधित मूल अभिलेखों में नंदो भूमिज का अधिकार बरकरार है और भूमि के हस्तांतरण या बिक्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इससे यह संकेत मिला कि जमीन के स्वामित्व को लेकर बाद में किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो सकती है। ग्रामसभा के सदस्यों ने कहा कि खतियान किसी भी भूमि विवाद में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है और इस मामले में मूल अभिलेख रैयतदार के पक्ष को मजबूत करते हैं। इसी आधार पर ग्रामसभा ने रैयतदार के दावे को प्राथमिक रूप से सही माना।

1964 के सर्वे सेटलमेंट में कथित हेराफेरी का आरोप

मामले की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 1964 के सर्वे सेटलमेंट के दौरान एक गैर-आदिवासी व्यक्ति के नाम उक्त जमीन दर्ज हो गई थी। ग्रामसभा का आरोप है कि यह प्रक्रिया संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और इसमें नियमों का पालन नहीं किया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि नंदो भूमिज या उनके परिवार की ओर से जमीन बेचने, दान करने अथवा किसी अन्य रूप में हस्तांतरित करने का कोई प्रमाण नहीं मिला। ऐसे में ग्रामसभा ने माना कि भूमि के स्वामित्व में परिवर्तन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं।
ग्रामसभा ने इस मामले को केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि आदिवासी भूमि अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों की जांच नहीं की गई तो कई रैयतदार अपनी पुश्तैनी जमीन से वंचित हो सकते हैं।

विवादित भूमि पर निर्माण कार्य पर लगाई गई रोक

किसी भी संभावित विवाद, तनाव या टकराव की स्थिति से बचने के लिए ग्रामसभा ने विवादित भूमि पर फिलहाल किसी भी प्रकार के नए निर्माण कार्य पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। सूचना पट्ट के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भूमि से संबंधित अंतिम निर्णय होने तक किसी भी व्यक्ति को निर्माण, खरीद-बिक्री या अन्य गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। ग्रामसभा का मानना है कि यदि विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहा तो भविष्य में स्थिति और जटिल हो सकती है। यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा दोनों पक्षों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। ग्रामसभा ने सभी ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील भी की है।

अंचल कार्यालय में होगी आगे की वैधानिक कार्रवाई

ग्रामसभा ने इस पूरे मामले से जुड़े अंतिम निर्णय को फिलहाल अपने अधीन सुरक्षित रखा है। साथ ही भूमि रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी और स्वामित्व संबंधी विवाद की जांच के लिए अंचल कार्यालय के स्तर पर आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामसभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि सभी दस्तावेज संबंधित विभागों को उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि राजस्व अभिलेखों की पुनः जांच हो सके और वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। रविवार को सूचना पट्ट लगाने के दौरान हातु मुंडा जगन्नाथ देवगम, जमीन मालिक नंदलाल भूमिज, मोना देवगम, सुनीता कुंकल, खुदीराम हांसदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष उपस्थित थे। ग्रामीणों ने ग्रामसभा के इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि आदिवासी रैयतदारों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। जसकनडीह में उठाया गया यह कदम ग्रामीण स्वशासन, पेसा कानून और भूमि अधिकारों की रक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जल्द ही इस विवाद का निष्पक्ष समाधान सामने आएगा।

Comments