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Bagbera Rural Water Supply Scheme: 11 साल बाद भी नहीं शुरू हुई जलापूर्ति, 14 जून को अनशन का ऐलान

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बागबेड़ा क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित बृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे स्थानीय निवासियों ने योजना के पूरा होने में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। इसी मुद्दे को लेकर रविवार को कीताडीह स्थित यादव क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पूर्व जिला परिषद सदस्य किशोर यादव ने की। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया तथा जलापूर्ति योजना की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

जून के पहले सप्ताह तक जलापूर्ति शुरू करने का दिया गया था आश्वासन
बैठक में बताया गया कि 22 मार्च 2026 को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार ने ग्राम विकास संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि जून के प्रथम सप्ताह तक बागबेड़ा बृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजना का कार्य पूरा कर क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी। लेकिन जून का पहला सप्ताह समाप्त होने के बावजूद योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। 7 जून तक भी किसी प्रकार की जलापूर्ति शुरू नहीं होने से स्थानीय लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग बार-बार आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं देता।

14 जून को टाटानगर स्टेशन चौक पर होगा एक दिवसीय अनशन
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जाएगा। जब तक बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूरी तरह चालू नहीं हो जाती, तब तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। आंदोलन के प्रथम चरण के तहत 14 जून 2026 को टाटानगर स्टेशन चौक पर एक दिवसीय अनशन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से विभाग और जिला प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की गंभीर पेयजल समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि इसके बाद भी योजना शुरू नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

11 वर्षों से अधूरी पड़ी है महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना
बागबेड़ा बृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजना क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस योजना का उद्देश्य हजारों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन विडंबना यह है कि लगभग 11 वर्षों के बाद भी यह योजना पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता, तकनीकी बाधाओं और विभागीय लापरवाही के कारण योजना लगातार विलंब का शिकार होती रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें आज भी पेयजल के लिए टैंकर, चापाकल और अन्य अस्थायी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

विभाग की कथनी और करनी में बड़ा अंतर : किशोर यादव
पूर्व जिला परिषद सदस्य किशोर यादव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। विभाग वर्षों से लोगों को केवल आश्वासन देता आया है, लेकिन योजना को पूरा करने में विफल रहा है। किशोर यादव ने कहा कि कार्यपालक अभियंता द्वारा जून के पहले सप्ताह तक जलापूर्ति शुरू करने का वादा किया गया था, लेकिन अब वह समय भी बीत चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग एक बार फिर नए बहाने बनाने की तैयारी में है। उनके अनुसार, क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि परिणाम चाहती है।

भीषण गर्मी में पेयजल संकट से परेशान हैं हजारों लोग
बागबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में इस समय भीषण गर्मी के कारण पेयजल संकट और अधिक गंभीर हो गया है। हजारों परिवारों को रोजाना पानी की व्यवस्था के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई मोहल्लों में लोगों को लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता है, जबकि कुछ स्थानों पर पानी की उपलब्धता बेहद सीमित है। बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि जलापूर्ति योजना समय पर शुरू हो जाती तो क्षेत्र के लोगों को इस समस्या से राहत मिल सकती थी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब वे अपने अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे और योजना के पूर्ण होने तक आंदोलन जारी रहेगा। बैठक में नीरज सिंह, श्याम किशोर, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, शिवजी सिंह, भोला यादव, सुरेश निषाद, मुदिता सिंह, डी.एन. सिंह, एस.एल. रावत, सुरेंद्र राय, कमलेश साह, भावनाथ सिंह, गुरमेल सिंह, श्रीराम शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बागबेड़ा की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

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