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दाना-पानी अभियान: दुमका के इस विद्यालय ने पक्षियों के संरक्षण की पेश की मिसाल, छात्र रोज भर रहे जलपात्र

प्रकृति से जुड़ने की अनोखी पहल बनी प्रेरणा

DUMKA NEWS: आज के दौर में जहां तेजी से बदलती जीवनशैली और शहरीकरण का असर पर्यावरण और जैव विविधता पर साफ दिखाई दे रहा है, वहीं दुमका जिले के जरमुंडी स्थित डुमरथर विद्यालय ने एक ऐसी पहल शुरू की है जो समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। विद्यालय में कई वर्षों से “दाना-पानी अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके तहत छात्र प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं। यह अभियान केवल पक्षियों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का भी माध्यम बन चुका है। विद्यालय परिसर में रोज दिखाई देने वाला यह दृश्य सभी को प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है।

मिट्टी के पात्रों में रोज सजता है पक्षियों के लिए दाना-पानी

डुमरथर विद्यालय के छात्र प्रतिदिन विद्यालय पहुंचने के बाद अपनी नियमित गतिविधियों के साथ पक्षियों के लिए लगाए गए मिट्टी के पात्रों को साफ करते हैं और उनमें ताजा पानी तथा दाना भरते हैं। विद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में इन पात्रों को इस तरह लगाया गया है कि पक्षियों को आसानी से भोजन और पानी मिल सके। गर्मी के मौसम में जब जल स्रोत कम होने लगते हैं, तब यह अभियान पक्षियों के लिए राहत का माध्यम बन जाता है। छात्र बड़ी जिम्मेदारी के साथ इस कार्य को करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी पात्र खाली न रहे। धीरे-धीरे यह काम उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। विद्यालय में आने वाले बच्चे अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के साथ अपने संबंध को भी समझ रहे हैं। यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

प्रधानाध्यापक डॉ. सपन कुमार की सोच से शुरू हुआ अभियान

इस सकारात्मक पहल के पीछे विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. सपन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी सोच थी कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को जीवन मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जोड़ना चाहिए। इसी विचार के साथ कई वर्ष पहले विद्यालय में दाना-पानी अभियान की शुरुआत की गई। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे छात्रों की भागीदारी बढ़ती गई और आज यह विद्यालय की पहचान बन चुका है। प्रधानाध्यापक का मानना है कि यदि बचपन से बच्चों को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाए तो आने वाले समय में समाज अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनेगा।

अभियान से बच्चों में बढ़ रही पर्यावरणीय चेतना

विद्यालय के इस अभियान का सबसे सकारात्मक प्रभाव छात्रों के व्यवहार में देखने को मिल रहा है। बच्चे अब पक्षियों की जरूरतों को समझ रहे हैं और उनके संरक्षण के महत्व को भी महसूस कर रहे हैं। कई छात्र अपने घरों में भी इसी तरह मिट्टी के बर्तन रखकर पक्षियों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराने लगे हैं। इससे यह पहल विद्यालय की सीमाओं से निकलकर समाज तक पहुंच रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस अभियान के माध्यम से बच्चों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, अनुशासन और सहयोग की भावना भी विकसित हुई है। यह गतिविधि उन्हें किताबों से परे वास्तविक जीवन के मूल्यों से जोड़ रही है।

छोटी पहल से बड़ा संदेश: जैव विविधता संरक्षण की ओर कदम

डुमरथर विद्यालय का दाना-पानी अभियान यह साबित करता है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकते हैं। पक्षियों के लिए रोजाना थोड़ी मात्रा में दाना और पानी रखना केवल सेवा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज जब जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है, तब ऐसे अभियान समाज को नई दिशा देते हैं। विद्यालय के छात्र जिस समर्पण के साथ यह कार्य कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। दुमका का यह विद्यालय बता रहा है कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।


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