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राजदोहा में खुलेगा ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र: संताली भाषा और संस्कृति संरक्षण की नई पहल

Jamshedpur News: जमशेदपुर के निकट स्थित राजदोहा गांव में आदिवासी भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। आदिवासी सोशियो एजुकेशनल एंड कल्चरल एसोसिएशन (आसेका) झारखंड की ओर से रविवार को ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया जाएगा। इस केंद्र का उद्देश्य संताली भाषा और उसकी लिपि ओलचिकी को नई पीढ़ी तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाना तथा युवाओं को अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब क्षेत्र के युवाओं में अपनी मातृभाषा के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। आसेका का मानना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि समुदाय की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का आधार होती है।

संगीत नाटक अकादमी सम्मानित दुर्गाप्रसाद मुर्मू करेंगे संचालन

इस प्रशिक्षण केंद्र की सबसे विशेष बात यह है कि इसका संचालन एवं देखरेख संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित दुर्गाप्रसाद मुर्मू के मार्गदर्शन में किया जाएगा। उनके जुड़ने से इस पहल को सांस्कृतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दुर्गाप्रसाद मुर्मू लंबे समय से आदिवासी संस्कृति, भाषा और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए कार्य करते रहे हैं। ऐसे अनुभवी व्यक्तित्व की उपस्थिति से प्रशिक्षण केंद्र केवल शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता का केंद्र भी बन सकता है। यह केंद्र बच्चों, युवाओं और भाषा सीखने के इच्छुक लोगों के लिए ओलचिकी लिपि को व्यवस्थित रूप से सीखने का अवसर उपलब्ध कराएगा।

ग्रीष्मकालीन परीक्षा में 2000 से अधिक परीक्षार्थियों ने लिया भाग

आसेका झारखंड के महासचिव शंकर सोरेन ने जानकारी दी कि संस्था द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन सत्र की परीक्षा 6, 7 और 8 जून को सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस परीक्षा में 2000 से अधिक परीक्षार्थियों ने भाग लिया। यह संख्या इस बात का संकेत है कि संताली भाषा और ओलचिकी सीखने को लेकर लोगों के बीच सकारात्मक माहौल बन रहा है। विशेष रूप से युवा वर्ग और विद्यार्थियों की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया है कि मातृभाषा आधारित शिक्षा के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। आसेका का मानना है कि भाषा संरक्षण के लिए केवल भावनात्मक जुड़ाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए प्रशिक्षण, अध्ययन और संस्थागत प्रयास भी जरूरी हैं।

संताल बहुल क्षेत्रों में बढ़ेंगे ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र

आसेका ने घोषणा की है कि आने वाले समय में झारखंड के विभिन्न संताल बहुल क्षेत्रों में अधिक से अधिक ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। इसका उद्देश्य भाषा को स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाना और नई पीढ़ी को उससे जोड़ना है। संस्था का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं के संरक्षण के लिए योजनाबद्ध प्रयास जरूरी हैं। इसी सोच के साथ राजदोहा में शुरू किया जा रहा प्रशिक्षण केंद्र एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। यदि यह पहल सफल रहती है तो भविष्य में अन्य गांवों और क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे अधिक लोगों तक भाषा शिक्षा पहुंच सके।

उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख अतिथि होंगे शामिल

राजदोहा में आयोजित उद्घाटन समारोह को लेकर भी व्यापक तैयारी की गई है। कार्यक्रम में संताल समाज और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया है। समारोह में पंडित रघुनाथ मुर्मू के पौत्र चुनियन रघु मुर्मू, परगना बाबा हरिपदो मुर्मू, तोरोप परगना बाबा दशमत हांसदा तथा देश पारानिक दुर्गाचरण मुर्मू सहित कई सम्मानित सामाजिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनकी उपस्थिति कार्यक्रम को सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान करेगी। इससे समाज के भीतर भाषा संरक्षण को लेकर सकारात्मक संदेश भी जाएगा।

मातृभाषा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

राजदोहा में ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आज के डिजिटल और वैश्विक दौर में स्थानीय भाषाओं को संरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र जैसी पहलें आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि समाज, शिक्षकों और संस्थाओं का सहयोग मिलता रहा तो संताली भाषा और ओलचिकी लिपि आने वाले समय में और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है।

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