https://omg10.com/4/11146156 पटमदा-बोड़ाम के जर्जर स्कूलों और शिक्षकों की कमी पर उपायुक्त से मिले समाजसेवी विश्वनाथ महतो, सौंपा ज्ञापन
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पटमदा-बोड़ाम के जर्जर स्कूलों और शिक्षकों की कमी पर उपायुक्त से मिले समाजसेवी विश्वनाथ महतो, सौंपा ज्ञापन

Jamshedpur news: पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जाने-माने समाजसेवी विश्वनाथ महतो ने उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालय पहुंचकर जिले के आला अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के अंतर्गत आने वाले विभिन्न सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति, जर्जर भवनों और शिक्षकों की भारी किल्लत के संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस मुलाकात के दौरान उपायुक्त के साथ-साथ जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) और जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) भी मौजूद रहे, जिन्हें क्षेत्र की वास्तविक और गंभीर समस्याओं से अवगत कराया गया।




ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर फूटा गुस्सा

समाजसेवी विश्वनाथ महतो ने अधिकारियों से बातचीत के दौरान कहा कि पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरकारी विद्यालयों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। लंबे समय से रख-रखाव और मरम्मत कार्य न होने के कारण कई विद्यालय भवन अब पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुके हैं। इन जर्जर भवनों में हर वक्त किसी न किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, जिससे वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों और तैनात शिक्षकों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज करने के बजाय वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि गरीब और जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके।

कुआरामा प्राथमिक विद्यालय में छज्जा गिरने की घटना से हड़कंप

सौंपे गए ज्ञापन में विशेष रूप से गोबरघूसी पंचायत के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय कुआरामा की अत्यंत चिंताजनक स्थिति की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया। विश्वनाथ महतो ने बताया कि हाल ही में इस विद्यालय भवन का एक हिस्सा (छज्जा) अचानक भरभराकर गिर गया था। गनीमत यह रही कि उस समय कोई बच्चा उसकी चपेट में नहीं आया, वरना एक बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर भारी डर और संकोच का माहौल व्याप्त है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भी प्रशासन का सुस्त रवैया चिंताजनक है।

इन विद्यालयों के पुनर्निर्माण और तत्काल मरम्मत की उठी मांग

ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र के कई अन्य प्रभावित और बदहाल विद्यालयों की सूची भी प्रशासन को सौंपी गई। विश्वनाथ महतो ने जोर देकर कहा कि निम्नलिखित विद्यालयों के भवनों की या तो अविलंब मरम्मत कराई जाए या फिर उनका नए सिरे से पुनर्निर्माण कराया जाए:

  • मेघादह विद्यालय
  • लड़ाईडूंगरी विद्यालय
  • कुकुड़ु विद्यालय
  • बिड़रा विद्यालय
  • जामडीह विद्यालय
  • काटिन लालाडूंगरी विद्यालय
  • रसिकनगर विद्यालय

इन सभी स्कूलों की स्थिति वर्तमान समय में बेहद दयनीय है और यहाँ कभी भी कुआरामा विद्यालय जैसी दुर्घटना दोहराई जा सकती है।

चारदीवारी, शौचालय और पेयजल का संकट

समाजसेवी ने केवल भवनों की जर्जर स्थिति का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पटमदा और बोड़ाम के अधिकांश स्कूलों में सुरक्षित चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं है, जिससे असामाजिक तत्वों और लावारिस पशुओं का परिसर में आना-जाना लगा रहता है। इसके अलावा, छात्राओं के लिए पृथक और स्वच्छ शौचालय तथा शुद्ध पेयजल (पीने के पानी) की व्यवस्था भी बेहद लचर है। बुनियादी सुविधाओं की इस कमी के कारण विशेष रूप से छात्राओं को स्कूल आने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका ड्रॉपआउट रेट भी बढ़ रहा है।

पटमदा मॉडल इंग्लिश स्कूल सहित कई विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा

भौतिक संरचना के साथ-साथ विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए शिक्षकों की उपलब्धता पर भी गंभीर चर्चा की गई। विश्वनाथ महतो ने अधिकारियों को बताया कि पटमदा मॉडल इंग्लिश स्कूल, उत्क्रमित उच्च विद्यालय (चौरा), उत्क्रमित मध्य विद्यालय (दिघी) तथा प्राथमिक विद्यालय (लोवाडीह) जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी है। शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ी है और उनका भविष्य अंधकार में डूब रहा है। उन्होंने मांग की कि इन विद्यालयों में आवश्यक संख्या के अनुसार नए शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति की जाए अथवा जब तक स्थायी बहाली नहीं होती, तब तक अन्य क्षेत्रों से शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

तकनीकी जांच के बाद जल्द शुरू होगी आवश्यक कार्रवाई

समाजसेवी विश्वनाथ महतो की बातों और सौंपे गए ज्ञापन को उपायुक्त, डीएसई और डीईओ ने बेहद गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक पहल करने का पूरा भरोसा दिया। उपायुक्त ने मौके पर ही मौजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी जर्जर विद्यालय भवनों की एक विस्तृत सूची तुरंत तैयार कर संबंधित तकनीकी विभाग को भेजी जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि भवनों की तकनीकी जांच रिपोर्ट आते ही मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शीघ्र शुरू करा दिया जाएगा। उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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