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ग्रामसभा की सहमति के बिना पंचायत भवन निर्माण का विरोध, ग्रामीणों ने डीसी से की हस्तक्षेप की मांग

Jamshedpur News: जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत दक्षिणी मध्य छोटा गोविंदपुर पंचायत में प्रस्तावित पंचायत भवन निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्रामसभा की सहमति लिए बिना पंचायत भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जो स्थानीय जनभावनाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को पंचायत की मुखिया गिरीबाला देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त (डीसी) से मिला और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना का निर्णय ग्रामसभा के माध्यम से लिया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों की राय और जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

विवादित भूमि पर निर्माण को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति


ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि जिस भूमि पर पंचायत भवन निर्माण प्रस्तावित है, वह पहले से विवादित बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार इस जमीन को लेकर सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में मामला लंबित है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करना भविष्य में विवाद और कानूनी जटिलताएं बढ़ा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि जब तक संबंधित मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य को स्थगित रखा जाए। ग्रामीणों का मानना है कि विवादित भूमि पर सरकारी भवन का निर्माण जनहित के बजाय नई समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

चयनित स्थान की उपयुक्तता पर भी उठे सवाल


ग्रामीणों ने केवल कानूनी विवाद ही नहीं बल्कि प्रस्तावित स्थान की व्यावहारिकता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जहां पंचायत भवन बनाए जाने की योजना है, उस क्षेत्र में आबादी अपेक्षाकृत कम है। इससे आम ग्रामीणों के लिए पंचायत भवन तक पहुंच आसान नहीं होगी। इसके अलावा वहां पार्किंग और अन्य आधारभूत सुविधाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पंचायत भवन एक ऐसा सार्वजनिक केंद्र होता है जहां बड़ी संख्या में लोग विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इसलिए भवन निर्माण के लिए ऐसी जगह का चयन जरूरी माना गया है जो सभी ग्रामीणों के लिए सुलभ और सुविधाजनक हो। ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि पंचायत क्षेत्र के केंद्र में या अधिक आबादी वाले इलाके में भवन निर्माण के लिए स्थान का चयन किया जाए।

ग्रामसभा आयोजित कर नए स्थान चयन की मांग


मुखिया गिरीबाला देवी और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने प्रशासन से आग्रह किया कि पंचायत भवन निर्माण से पहले विधिवत ग्रामसभा आयोजित की जाए। ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों की राय ली जाए और सामूहिक सहमति के आधार पर नए स्थान का चयन किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामसभा पंचायत व्यवस्था की मूल इकाई है और उससे जुड़े निर्णय पारदर्शिता एवं जनभागीदारी के आधार पर होने चाहिए। यदि ग्रामसभा की अनदेखी कर निर्माण कराया जाता है तो इससे भविष्य में सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सभी पक्षों की बात सुनने और जनहित में निर्णय लेने की अपील की।

ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष निर्णय की जताई उम्मीद


इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। उनका कहना है कि पंचायत भवन का निर्माण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थानीय सहभागिता का पालन भी उतना ही आवश्यक है। ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सामाजिक सेवा संघ अध्यक्ष राजेश सामंत, वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी जेना जामुदा, ग्राम प्रधान रामजीवन सिंह मुंडा, ग्राम प्रधान रामदास बेसरा, जितेंद्र ठाकुर, छोटे सरदार, रूपम सिंह, अनूप कुमार, सुधांशु कुमार, सुलोचना लोहरा और विजय पूर्ति समेत कई ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द ग्रामसभा बुलाकर पंचायत भवन निर्माण के लिए उपयुक्त और सर्वसम्मति वाला समाधान निकाले, ताकि विकास कार्य और जनहित दोनों का संतुलन बना रहे।

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