Jamshedpur News: जमशेदपुर के बागबेड़ा क्षेत्र में ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर एक बार फिर लोगों का आक्रोश सामने आया है। रामनगर और लकड़िया बागान बस्ती के निवासियों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2015-16 में प्रत्येक घर से पानी कनेक्शन देने के नाम पर 450 रुपये लिये गये थे, लेकिन करीब 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने पहले उपायुक्त (डीसी) से मुलाकात की और बाद में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।
11 वर्ष पहले लिये गये थे कनेक्शन शुल्क, लेकिन सुविधा अब तक नहीं
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2015-16 के दौरान पंचायत स्तर पर और संबंधित विभाग की ओर से घर-घर जाकर जलापूर्ति योजना के तहत पानी कनेक्शन देने के लिए 450 रुपये प्रति परिवार जमा कराया गया था। लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही पाइपलाइन बिछाकर घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो कई इलाकों में पाइपलाइन बिछी और न ही लोगों को पानी का कनेक्शन मिला। इससे ग्रामीणों में निराशा और नाराजगी दोनों बढ़ती गयी।
डीसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर जताया विरोध
अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने पहले डीसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने प्रशासन से जल्द जलापूर्ति योजना को धरातल पर उतारने और लंबे समय से लंबित पाइपलाइन कार्य शुरू करने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर पाइपलाइन बिछाने और पानी कनेक्शन की दिशा में काम शुरू नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने वर्षों से लंबित समस्या के समाधान की मांग जोरदार तरीके से उठायी। ग्रामीणों का कहना था कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए इतने लंबे समय तक इंतजार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
डीसी से मुलाकात के बाद अधिकारियों को मिला निर्देश
प्रदर्शन के बाद बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि लोगों ने निर्धारित राशि जमा की थी, लेकिन अब तक उन्हें लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों की बात सुनने के बाद उपायुक्त ने संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता से फोन पर संपर्क कर मामले के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि योजना के कार्यों में तेजी लायी जाएगी और लंबित हिस्सों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करने की भी मांग की।
एसडीओ को सौंपा गया हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन और दस्तावेज
कार्यपालक अभियंता की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शिवकुमार दिनकर से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने ज्ञापन के साथ सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज, पानी कनेक्शन के लिए जमा किये गये 450 रुपये की रसीदें तथा आधार कार्ड की प्रतियां भी प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों का कहना था कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि लोगों ने योजना के तहत भुगतान किया था।महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी इस आंदोलन में देखने को मिली। उनका कहना था कि पानी की समस्या का सबसे अधिक असर घरों की दिनचर्या पर पड़ता है।
प्रशासन का दावा–जुलाई तक पूरा होगा काम
एसडीओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जलापूर्ति योजना से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उनके अनुसार जुलाई तक फिल्टर प्लांट तक पाइपलाइन बिछाने सहित आवश्यक कार्य पूरे कर लिये जाएंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 15 अगस्त से पहले एक जल टंकी से पानी आपूर्ति शुरू करने की योजना है, जिससे लगभग 2000 घरों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा रामनगर और लकड़िया बागान बस्ती में पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं की भागीदारी और लोगों की उम्मीदें
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में पवित्रा पांडे, अंजू देवी, मंजू देवी, सरिता सिंह, रजनी तिवारी, कृष्ण सिंह सहित कई स्थानीय लोग शामिल रहे। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर काम देखना चाहते हैं। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन द्वारा तय समयसीमा के भीतर जलापूर्ति योजना पूरी होगी और वर्षों से प्रतीक्षित पेयजल सुविधा आखिरकार उनके घरों तक पहुंचेगी। बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं और प्रशासन की जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन चुकी है। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि वर्षों पुरानी यह समस्या वास्तव में खत्म होती है या नहीं।
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