https://omg10.com/4/11146156 यूसील तुरामडीह रोजगार विवाद: बहाली प्रक्रिया को लेकर दो पक्ष आमने-सामने, संयुक्त ग्राम सभा और विस्थापित समिति ने रखे अपने-अपने पक्ष
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यूसील तुरामडीह रोजगार विवाद: बहाली प्रक्रिया को लेकर दो पक्ष आमने-सामने, संयुक्त ग्राम सभा और विस्थापित समिति ने रखे अपने-अपने पक्ष

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के यूसिल (UCIL) तुरामडीह क्षेत्र में स्थानीय रोजगार एवं मजदूर बहाली को लेकर सोमवार को तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। रोजगार प्रक्रिया और पूर्व में हुए समझौते को लेकर दो पक्षों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। एक ओर नंदूप विस्थापित समिति ने धरना-प्रदर्शन और गेट जाम का आयोजन किया, वहीं दूसरी ओर संयुक्त ग्राम सभा, माझी बाबा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस आंदोलन का विरोध करते हुए अपने पक्ष को सामने रखा kish up i8ijiijbo

त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर उठी आपत्ति

प्रदर्शन कर रहे नंदूप विस्थापित समिति के सदस्यों का कहना था कि 28 मई को जादूगोड़ा और 8 जून को हुई त्रिपक्षीय वार्ता एवं समझौते को पुनर्विचार के लिए वापस लिया जाना चाहिए। समिति का आरोप था कि रोजगार बहाली की प्रक्रिया में विस्थापितों की अपेक्षाओं और मांगों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। धरना-प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री Arjun Munda, Meera Munda सहित भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने पहुंचकर आंदोलनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

संयुक्त ग्राम सभा ने समझौते के समर्थन में रखा पक्ष

दूसरी ओर संयुक्त ग्राम सभा, माझी बाबा एवं स्थानीय प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन नहीं किया और कहा कि पूर्व में हुई त्रिपक्षीय वार्ता ग्राम सभाओं के सत्यापन और सहमति की प्रक्रिया के बाद आगे बढ़ाई गई थी। संयुक्त ग्राम सभा के प्रतिनिधियों का कहना था कि सभी संबंधित ग्राम सभाओं से सत्यापन कराने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन कुछ समूह इस प्रक्रिया को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार रोजगार प्रक्रिया को पारदर्शी और स्थानीय हितों के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

दलाली और बिचौलियागिरी के खिलाफ ग्रामीणों की नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा भी मौजूद रहे। संयुक्त ग्राम सभा से जुड़े लोगों ने मजदूर बहाली में किसी भी प्रकार की कथित दलाली याl9बिचौलियागिरी का विरोध जताया। इसी क्रम में कुछ आक्रोशित विस्थापित एवं प्रभावित युवाओं और महिलाओं ने रैली निकाली तथा विरोध स्वरूप पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का पुतला दहन किया। रैली के दौरान विभिन्न नारे लगाए गए जिनमें मजदूर अधिकार, स्थानीय रोजगार और ग्राम सभा के समर्थन से जुड़े संदेश शामिल रहे।

स्थानीय नेतृत्व ने अधिकारों की सुरक्षा पर दिया जोर

इस अवसर पर माझी बाबा एवं पंचायत मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने कहा कि स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मजदूर बहाली प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या बिचौलियापन स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाती रहेगी। Ïहालांकि दूसरी ओर आंदोलनकारी पक्ष भी रोजगार प्रक्रिया की समीक्षा और अपने दावों को लेकर आगे संवाद की आवश्यकता पर जोर देता रहा।

बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी, आगे संवाद की उम्मीद

पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और महिलाएं मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार लगभग दो हजार से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। यूसिल क्षेत्र में रोजगार और बहाली का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे और चिंताएं सामने आई हैं। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि भविष्य में सभी पक्ष आपसी संवाद, ग्राम सभा की सहभागिता और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

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