https://omg10.com/4/11146156 झारखंड में गंडा समाज ने अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की उठाई मांग, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम डीसी को सौंपा ज्ञापन
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झारखंड में गंडा समाज ने अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की उठाई मांग, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम डीसी को सौंपा ज्ञापन

Jamshedpur News: जमशेदपुर में गंडा समाज ने अपनी लंबे समय से लंबित मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष फिर आवाज बुलंद की है। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से मुलाकात कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज की मुख्य मांग झारखंड में गंडा समाज को अनुसूचित जाति (एससी) की सूची में शामिल किए जाने की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस मांग की अनदेखी के कारण समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार और आरक्षण जैसे संवैधानिक लाभों से वंचित रहना पड़ रहा है।

अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की मांग को लेकर सौंपा गया ज्ञापन
शुक्रवार को गंडा समाज का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रशासन से मिला और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नरेश कुमार तांडिया ने किया। ज्ञापन में समाज की ओर से कहा गया कि गंडा समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहा है। कई बार सरकार और प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि इस विषय पर जल्द कार्रवाई की जाए ताकि समुदाय के लोगों को संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिल सके।

झारखंड में बड़ी संख्या में निवास करते हैं गंडा समाज के लोग
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि झारखंड के विभिन्न जिलों में लगभग डेढ़ लाख गंडा समाज के लोग निवास करते हैं। समाज का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद उन्हें अब तक वह सामाजिक और प्रशासनिक पहचान नहीं मिली जिसकी वे अपेक्षा कर रहे हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े होने के कारण समुदाय के लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अनुसूचित जाति का दर्जा मिलने से उन्हें शिक्षा, सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों में मदद मिल सकती है। समाज के लोगों का मानना है कि इससे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

अन्य राज्यों में मिल चुका है अनुसूचित जाति का दर्जा
गंडा समाज के प्रतिनिधियों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि देश के कई राज्यों में इस समुदाय को पहले से अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जा चुका है।
नरेश कुमार तांडिया ने कहा कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गंडा समाज के लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में झारखंड में भी समान आधार पर इस समुदाय को सूची में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। समाज का तर्क है कि यदि अन्य राज्यों में समुदाय को यह मान्यता मिल सकती है, तो झारखंड में भी इस दिशा में पहल की जानी चाहिए।

जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने से शिक्षा और रोजगार में परेशानी
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि गंडा समाज के बच्चों को जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता, छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित रहना पड़ता है और सरकारी नौकरियों में भी अवसर सीमित हो जाते हैं। समाज के लोगों का कहना है कि इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका मानना है कि यदि समुदाय को अनुसूचित जाति सूची में शामिल किया जाता है तो सामाजिक और आर्थिक विकास की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

मांग पूरी नहीं होने पर जनांदोलन की चेतावनी
गंडा समाज ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को यह संदेश भी दिया कि यदि उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से जनांदोलन शुरू करने पर विचार करेंगे। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज लंबे समय से धैर्य के साथ अपनी बात रखता आया है, लेकिन अब इस मुद्दे पर ठोस पहल की आवश्यकता है। इस अवसर पर नरेश कुमार टांडिया, फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरन दीप, कृपा नाग, मोतीलाल करन, बबली कुमार, पूनम भुइयां, तनुज भुइयां, रवि महानंद, लक्षमी महानंद, सागर सोना, सोनू सोना, मनोज नाग, मदन कुमार, बलराम तांती, बाबू नाग, दिलीप दीप, अरुण दीप, आनंद नाग, प्रिया नाग, अंजलि छतर, प्रिया तांडी, राज सागर सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

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