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झारखंड में आदिवासी उद्यमियों की उपेक्षा पर भड़का टिक्की, जियाडा की बैठक में नहीं बुलाने पर जताई नाराजगी

Jamshedpur News: जमशेदपुर के सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चरल सेंटर (टीसीसी) में सोमवार को ट्राईबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (टिक्की), झारखंड चैप्टर की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष बैद्यनाथ मांडी ने की। इस दौरान राज्य में आदिवासी उद्यमियों की स्थिति, उद्योगों में उनकी भागीदारी और सरकारी नीतियों में उनकी उपेक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित उद्यमियों ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में भी आदिवासी समाज को उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। सरकार और संबंधित विभागों द्वारा आदिवासी उद्यमियों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें निराशा बढ़ रही है।

जियाडा की बैठक में नहीं बुलाने पर जताई नाराजगी

बैठक को संबोधित करते हुए बैद्यनाथ मांडी ने कहा कि आदिवासी उद्यमियों को उद्योग-धंधों से दूर रखने की एक सुनियोजित प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिक्की द्वारा समय-समय पर अधिकारियों और विभागों से मुलाकात करने तथा कई बार पत्राचार करने के बावजूद उनकी मांगों और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के युवा व्यवसाय और उद्योग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नीतिगत सहयोग और संसाधनों की उपलब्धता नहीं मिल रही है। परिणामस्वरूप राज्य के औद्योगिक विकास में आदिवासी समाज की भागीदारी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। बैद्यनाथ मांडी ने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में समावेशी विकास की पक्षधर है तो उसे आदिवासी उद्यमियों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए और उनके लिए विशेष नीतियां बनानी चाहिए।

2019 में लिया गया निर्णय आज भी अधिसूचना का इंतजार कर रहा

बैठक में वर्ष 2019 में लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय का भी उल्लेख किया गया। बैद्यनाथ मांडी ने बताया कि 12 जुलाई 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं जियाडा अध्यक्ष रघुवर दास की अध्यक्षता में आयोजित आठवीं निदेशक मंडल की बैठक में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि मूल्य का 50 प्रतिशत भुगतान कर जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस निर्णय की प्रति संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जा चुकी है, लेकिन सात वर्षों के बाद भी इसकी अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है। मौजूदा सरकार के दो कार्यकाल पूरे होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे आदिवासी उद्यमियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। बैठक में यह भी कहा गया कि यदि इस निर्णय को लागू किया जाता है तो बड़ी संख्या में आदिवासी युवा उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में आगे आ सकते हैं।

जियाडा की बैठक में टिक्की को नहीं बुलाने पर उठे सवाल

सोमवार को रांची के एक होटल में झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) द्वारा उद्योग और निवेश से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन इस बैठक में टिक्की जैसे प्रमुख संगठन को आमंत्रित नहीं किया गया। इस मुद्दे पर बैठक में उपस्थित उद्यमियों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि आदिवासी उद्यमियों के हितों और उनकी भागीदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा हो और उसमें आदिवासी प्रतिनिधियों को ही शामिल न किया जाए, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। टिक्की के सदस्यों ने कहा कि उद्योग और व्यापार से संबंधित किसी भी नीति निर्माण या संशोधन में आदिवासी संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे जमीनी समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी।

25 वर्षों बाद भी नहीं बनी आदिवासियों के लिए अलग उद्योग नीति

टिक्की के वरिष्ठ सदस्य बसंत तिर्की ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद आदिवासी समाज के लिए कोई ठोस औद्योगिक और व्यापारिक नीति नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के पीछे आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही, लेकिन विकास और उद्योग के क्षेत्र में उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
उन्होंने कहा कि एसटी-एससी वर्ग के उद्यमियों को रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय भी फाइलों तक सीमित रह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि आदिवासी उद्यमियों के हितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। बसंत तिर्की ने कहा कि यदि सरकार आदिवासी युवाओं को उद्योगों से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएं लागू करे, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए तो राज्य में रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।

बुनियादी अधिकारों और अवसरों के लिए आज भी संघर्ष जारी

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आदिवासी समाज आज भी अपने बुनियादी अधिकारों और आर्थिक अवसरों के लिए संघर्ष कर रहा है। उद्योग, व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की कि लंबित फैसलों को जल्द लागू किया जाए, आदिवासी उद्यमियों को औद्योगिक भूमि आवंटन में प्राथमिकता दी जाए तथा नीति निर्माण की प्रक्रिया में टिक्की जैसे संगठनों को शामिल किया जाए। बैठक में बसंत तिर्की, राज मार्शल मार्डी, गोमिया सुंडी, अनमोल पिंगुवा, रामलाल माहली, शेखर करवा, जोसेफ कांडिर, प्रीतम मुखी, रतन मुखी समेत कई आदिवासी उद्यमी उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में आदिवासी उद्यमियों के अधिकारों और उद्योगों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

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