Jamshedpur Book Fair: जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेर परिसर रविवार को साहित्य, शिक्षा और संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया, जब चार दिवसीय जमशेदपुर पुस्तक मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में सीबीएसई बोर्ड की आईएससी बायो साइंस की नेशनल टॉपर एवं सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा शांभवी तिवारी और कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव रंजीत कुमार कर्ण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। पूरे परिसर में पुस्तक प्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण मौजूदगी देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा रिसर्च एसोसिएशन (प्राण), रांची के डॉ. विजय प्रकाश ने किया।

साहित्यकारों व अतिथियों को सम्मानित किया गया सम्मान
समारोह के दौरान समय इंडिया, नई दिल्ली के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। इस अवसर पर संथाली भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुर्मू, शिक्षाविद् डॉ. दीपांजय श्रीवास्तव, डॉ. विनय कुमार गुप्ता तथा शांभवी तिवारी के माता-पिता निभा सिन्हा और राकेश रमण को सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने पुस्तकों के महत्व पर अपने विचार रखे और युवाओं को पढ़ने की संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भाग लिया।


मोबाइल नहीं, किताबों से मिलती है असली शिक्षा : शांभवी तिवारी
अपने प्रेरणादायक संबोधन में नेशनल टॉपर शांभवी तिवारी ने विद्यार्थियों से मोबाइल और स्क्रीन पर निर्भरता कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के समय में अधिकतर छात्र डिजिटल माध्यमों पर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन किताबों से पढ़ाई करने का अनुभव और प्रभाव अलग होता है। शांभवी ने कहा, “मोबाइल और स्क्रीन से सिरदर्द और तनाव बढ़ता है, जबकि किताबों से पढ़ने में एकाग्रता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। ऑफलाइन स्टडी से सीखने की क्षमता मजबूत होती है और हौसला मिलता है।” उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।

किताबें जीवन की फिलॉसफर और मेंटर हैं : रंजीत कुमार कर्ण
कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव रंजीत कुमार कर्ण ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हार्ड कॉपी में पढ़ने का जो अनुभव और गहराई है, वह डिजिटल माध्यमों में संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “किताबें केवल हमारी दोस्त नहीं होतीं, बल्कि जीवन की फिलॉसफर और मेंटर भी होती हैं। अच्छी पुस्तकें इंसान के विचार, व्यक्तित्व और जीवन को दिशा देती हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने का आग्रह किया।


बुके नहीं, बुक से स्वागत’ थीम बनी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष पुस्तक मेले की थीम “बुके नहीं, बुक से स्वागत कीजिए” लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। इसी थीम के तहत डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने अपनी पुस्तक “भारत में महिला सशक्तिकरण” अतिथियों को भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में चंद्र भूषण ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा, “जो पुस्तकों के आगे झुकते हैं, उन्हें किसी और के आगे झुकने की जरूरत नहीं पड़ती।” इस संदेश ने उपस्थित युवाओं और विद्यार्थियों को गहराई से प्रभावित किया। पुस्तक प्रेमियों ने विभिन्न स्टॉलों पर पहुंचकर साहित्य, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और बाल पुस्तकों में विशेष रुचि दिखाई।

प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों और युवाओं को मिलेगा मंच
आयोजकों ने जानकारी दी कि पुस्तक मेले के दूसरे दिन सोमवार 11 मई को शाम 4:30 बजे सभागार मंच पर चित्रकला, गायन, कहानी-कविता वाचन तथा नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का कहना है कि पुस्तक मेला केवल किताबों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने का एक बड़ा मंच है। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में शहर के साहित्यकार, विद्यार्थी, कलाकार और पुस्तक प्रेमी बड़ी संख्या में भाग लेंगे।