जसकनडीह ग्रामसभा का अंचल कार्यालय पर एकदिवसीय धरना
Jamshedpur News: जमशेदपुर प्रखंड के जसकनडीह गांव में ग्रामसभा के पारंपरिक ग्रामप्रधान (हातु मुंडा) जगन्नाथ देवगम को कथित रूप से धमकी देने और गाली-गलौज करने के विरोध में ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय परिसर में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। धरने में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मियों तथा कथित भू-माफियाओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। धरना समाप्त होने के बाद ग्रामसभा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम एक मांग पत्र अंचलाधिकारी मनोज कुमार को सौंपा। ग्रामीणों का कहना था कि ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए और आदिवासी जमीन से जुड़े मामलों में कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामप्रधान ने पुलिसकर्मियों पर धमकी देने का लगाया आरोप
धरना के दौरान ग्रामप्रधान जगन्नाथ देवगम ने बताया कि 13 जुलाई की शाम लगभग चार बजे परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे। उनके अनुसार पुलिसकर्मियों ने उन्हें विवादित जमीन के मामले से दूर रहने की चेतावनी दी और जान से मारने तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।kolk8उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और ग्रामसभा द्वारा विवादित भूमि पर लगाए गए सूचना बोर्ड को हटाने का दबाव बनाया गया। ग्रामप्रधान ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान पर आघात है, बल्कि ग्रामसभा की गरिमा और पारंपरिक व्यवस्था का भी अपमान है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
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जमीन विवाद को लेकर ग्रामसभा ने रखी अपनी बात
ग्रामसभा का कहना है कि संबंधित भूमि का रिकॉर्ड वर्ष 1932 के सर्वे सेटलमेंट में मुकुंद भूमिज के नाम दर्ज था। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 1964 के सर्वे सेटलमेंट में अंचल कार्यालय की मिलीभगत से उक्त भूमि exपर महावीर प्रसाद का नाम दर्ज कर दिया गया, जिसके कारण स्वामित्व को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। ग्रामसभा के अनुसार, मामले की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया था कि जब तक भूमि विवाद का कानूनी समाधान नहीं हो जाता, तब तक उस जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद कुछ बाहरी तत्व लगातार जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि भूमि विवाद राजस्व विभाग और अंचल कार्यालय से संबंधित विषय है। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था तक सीमित होनी चाहिए, लेकिन पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से जमीन विवाद में हस्तक्षेप कर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
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डेमका सोय ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना-प्रदर्शन के दौरान झारखंड आंदोलनकारी डेमका सोय ने कहा कि ग्रामप्रधान गांव की पारंपरिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधि होता है। यदि उसके साथ गाली-गलौज और धमकी जैसी घटनाएं होती हैं तो यह पूरे ग्रामसभा का अपमान माना जाएगा।उन्होंने कहा कि यदि आरोपित पुलिसकर्मियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो जसकनडीह ग्रामसभा उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनके संबोधन के दौरान ग्रामीणों ने ग्रामसभा के अधिकारों की रक्षा और आदिवासी भूमि की सुरक्षा के समर्थन में नारे लगाए।
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मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
ग्रामसभा की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल की गई हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों में पुलिस का अनावश्यक हस्तक्षेप तत्काल रोका जाए। साथ ही भू-माफियाओं के साथ कथित मिलीभगत कर छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। Kñइसके अलावा ज्ञापन में आदिवासी रैयतों को न्याय दिलाने के लिए पेसा कानून-1996 तथा पेसा नियमावली-2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई। ग्रामीणों ने आदिवासी समाज की अस्मिता, परंपरागत अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील भी की।
बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल, निष्पक्ष जांच की मांग
धरना-प्रदर्शन में गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। प्रमुख रूप से सुनीता कुंकल, मोना देवगम, मजूमदार हेंब्रम, सुनील देवगम, रामचंद्र सिंह, जगदीश भूमिज, सोनू भूमिज, राजू भूमिज, अभि भूमिज, संगीता भूमिज, लखविंदर कुंकल, वृहस्पति सरदार, खुदीराम हांसदा, सोमवारी भूमिज और जानकी भूमिज सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ग्रामसभा के अधिकारों की रक्षा, आदिवासी भूमि की सुरक्षा और पारंपरिक व्यवस्था का सम्मान लोकतांत्रिक शासन की मूल भावना है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
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