Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर टेल्को रोड नंबर-18 स्थित करम अखड़ा में दिसुआ आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी आस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ हुई, जिसमें समाज के लोगों ने करम गोसांई की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इसके बाद करम का एक पौधा और साल के चार पौधे लगाए गए। इस अवसर पर समाज के लोगों ने यह संकल्प भी लिया कि आने वाले दिनों में अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। यह आयोजन केवल एक औपचारिक पौधारोपण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी के संगम का प्रतीक बनकर सामने आया।
पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ लगाया गया करम और साल का पौधा
कार्यक्रम का नेतृत्व कुड़मी समाज के पारंपरिक पुजारी एवं झारखंड प्रदेश संयोजक प्रकाश महतो ने किया। उन्होंने सबसे पहले करम गोसांई की पूजा-अर्चना कर समाज की समृद्धि, सुख-शांति और प्राकृतिक संतुलन की कामना की। पूजा के बाद करम का एक पौधा तथा साल के चार पौधे रोपे गए। कुड़मी समाज में करम वृक्ष का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। करम पर्व के दौरान इसी वृक्ष की पूजा की जाती है और इसे सुख-समृद्धि, भाईचारे तथा प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। वहीं साल का वृक्ष झारखंड की पहचान माना जाता है और आदिवासी जीवन, संस्कृति तथा आजीविका से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए इन दोनों पौधों का रोपण समाज की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता है।
'कुड़मी समाज प्रकृति का पूजक है' : प्रकाश महतो
प्रदेश संयोजक एवं पारंपरिक पुजारी प्रकाश महतो ने कहा कि कुड़मी समाज का जीवन प्रकृति से जुड़ा हुआ है। समाज के देवी-देवताओं का आह्वान खुले प्राकृतिक वातावरण में किया जाता है और पेड़-पौधों के बीच ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि धार्मिक आस्था का भी हिस्सा है। उन्होंने बताया कि करम, साल और अन्य वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, जल और जैव विविधता भी सुरक्षित करते हैं। उन्होंने समाज के सभी लोगों से अपने घर, गांव और मोहल्ले में अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। उनका कहना था कि पौधारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधे बड़े होकर वृक्ष बनें।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज ने लिया सामूहिक संकल्प
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और लगातार घटते वन क्षेत्र के बीच प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर पौधे लगाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि लोगों में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी दोनों बढ़े। कुड़मी समाज लंबे समय से प्रकृति आधारित जीवन शैली का पालन करता आया है और यह अभियान उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। समाज के युवाओं और महिलाओं से भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।
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करम अखड़ा बना सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता का केंद्र
बिरसानगर का करम अखड़ा वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर समाज के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार पौधारोपण अभियान की शुरुआत इसी स्थान से कर यह संदेश दिया गया कि धार्मिक स्थलों और सामुदायिक परिसरों को भी हरियाली से समृद्ध बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि यदि प्रत्येक समुदाय अपने धार्मिक और सामाजिक स्थलों पर पौधारोपण अभियान चलाए, तो शहरों में हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में सामूहिक सहभागिता की भावना भी मजबूत होगी।
पौधारोपण कार्यक्रम में समाज के कई सदस्य उपस्थित रहे
इस अवसर पर प्रदेश संयोजक प्रकाश महतो के अलावा नमिता महतो, निर्मल महतो, संटू महतो, निरानंद महतो, आनंद महतो, बीरसिंह महतो, पवन महतो, सूरज महतो, प्रतीक महतो, गीता महतो, सोनामणि महतो, रानी महतो, टिआसा महतो, पूर्णिमा महतो, निछु महतो सहित बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष एवं युवा सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया और भविष्य में भी इस प्रकार के अभियान को निरंतर चलाने का निर्णय लिया। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि हरियाली बढ़े, पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सके।
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