Jharkhand news: Hemant Soren ने राज्य के सभी डीसी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि गांवों में लंबे समय तक बिजली बाधित नहीं रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का बाधित होना आम लोगों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री के इस निर्देश को ग्रामीण जनता के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

पलामू के गांव में 20 दिनों से अधिक समय तक बाधित रही बिजली
मुख्यमंत्री को जानकारी मिली थी कि Palamu जिले के रजवाडीह पंचायत अंतर्गत बड़कागांव में लगभग 20 से 22 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप थी। इससे करीब 150 परिवार भीषण गर्मी में परेशान थे। ग्रामीणों ने नया ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की थी। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद उन्होंने पलामू डीसी को तत्काल समाधान करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और बिजली व्यवस्था सुधारने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कोडरमा के गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
इधर Koderma जिले के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों की स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है। यहां ग्रामीण दूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं। लोग पहले उसी पानी से बर्तन साफ करते हैं और फिर पीने के लिए भी उसी का उपयोग करते हैं। गांवों में पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने कोडरमा डीसी को भी तत्काल संज्ञान लेने का निर्देश दिया है।

अधिकांश गांवों में महीनों तक बिजली बहाल नहीं होने से बढ़ रही परेशानी
झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में बिजली गुल होने के बाद उसे बहाल करने में एक से डेढ़ महीने तक का समय लग जाता है। कई गांवों में ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद महीनों तक उसे बदला नहीं जाता। बिजली विभाग की लापरवाही और संसाधनों की कमी का सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ता है। गर्मी के मौसम में बिजली नहीं रहने से पेयजल संकट और भी गहरा जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, मोबाइल चार्ज करना तक मुश्किल हो जाता है और छोटे व्यवसाय ठप पड़ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शहरों की तुलना में गांवों की समस्याओं पर कम ध्यान दिया जाता है।

स्थायी समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता
गांव के बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल निर्देश देने से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। गांव स्तर पर बिजली मरम्मत टीम, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। कई इलाकों में बिजली तार और पोल पुराने हो चुके हैं, जिससे बार-बार फॉल्ट होता है। यदि प्रत्येक प्रखंड में आपातकालीन तकनीकी टीम बनाई जाए तो बिजली बहाली का समय काफी कम किया जा सकता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा को भी बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि बिजली संकट की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो सके।

ग्रामीण विकास के लिए बिजली व्यवस्था मजबूत होना जरूरी
ग्रामीण विकास की नींव मजबूत बिजली व्यवस्था पर निर्भर करती है। बिजली नहीं रहने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार सभी प्रभावित होते हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब गांवों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि केवल आदेश नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई और जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा। यदि सरकार और प्रशासन मिलकर ग्रामीण बिजली व्यवस्था को प्राथमिकता दें तो झारखंड के हजारों गांवों की स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।