Jamshedpur news : शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला होती है, लेकिन जब आर्थिक बाधाएं छात्रों के भविष्य के आड़े आने लगें, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। इसी मुद्दे को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को जेएलकेएम के अनुसूचित जाति मोर्चा ने कोल्हान प्रमंडल के नेतृत्व में जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी से मुलाकात कर छात्रों की पीड़ा को उनके समक्ष रखा।



छात्र प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के अनुसूचित जाति मोर्चा के कोल्हान प्रमंडल अध्यक्ष राजा कालिंदी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को पूर्वी सिंहभूम के जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचा। यहां कार्यकर्ताओं और छात्र प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए लंबित छात्रवृत्ति राशि को अविलंब जारी करने का आग्रह किया गया है। राजा कालिंदी ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने इस पर जल्द संज्ञान नहीं लिया, तो छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

एसटी, एससी व ओबीसी छात्रों की बढ़ी मुश्किलें
सौंपे गये ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि छात्रवृत्ति की कमी का सबसे अधिक प्रभाव अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। ये वे छात्र हैं जो न केवल झारखंड के भीतर, बल्कि राज्य के बाहर भी विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। छात्रवृत्ति में हो रही देरी के कारण इन वर्गों के मेधावी छात्र आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। जेएलकेएम ने प्रशासन को आगाह किया कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े इन छात्रों के लिए छात्रवृत्ति केवल एक सहायता नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा का एकमात्र आधार है।

नये सत्र में नामांकन व अन्य खर्चों का संकट
वर्तमान समय में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। कॉलेज, यूनिवर्सिटी और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन की प्रक्रिया जोरों पर है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि छात्रवृत्ति राशि न मिलने के कारण छात्रों को एडमिशन फीस जमा करने में भारी कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, ड्रेस और हॉस्टल के खर्चों का वहन करना गरीब परिवारों के लिए असंभव होता जा रहा है। कई छात्र ऐसे हैं जिनके पास अपनी अगली कक्षा में प्रवेश लेने के लिए न्यूनतम राशि भी उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी पढ़ाई के बीच में ही छूट जाने का वास्तविक खतरा पैदा हो गया है।

छात्रों के भविष्य से खिलाड़ बर्दाश्त नहीं किया जायेगा
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राजा कालिंदी ने झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पड़ोसी राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के सीमावर्ती राज्यों में विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति का भुगतान कर दिया गया है, जिससे वहां के छात्रों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हो रही है। इसके विपरीत, झारखंड में सत्र बीत जाने के बावजूद राशि का वितरण न होना चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता करार देते हुए कहा कि राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

छात्र हित में आंदोलन की चेतावनी
अंत में, जेएलकेएम के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को संदेश भेजा है कि छात्रों के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। राजा कालिंदी ने कहा कि कई छात्र पूरी तरह से सरकारी सहायता पर निर्भर हैं और छात्रवृत्ति ही उनके सपनों को साकार करने का एकमात्र जरिया है। जेएलकेएम ने मांग की है कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर सभी लंबित आवेदनों का सत्यापन कर राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों (DBT) में भेजी जाए। यदि जल्द ही भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तो मोर्चा छात्र हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।