https://omg10.com/4/11146156 बिरसानगर PM आवास योजना पर उठे सवाल: कृष्णा हांसदा ने लाभुक चयन और स्थानीय हितों पर मांगी पारदर्शिता
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बिरसानगर PM आवास योजना पर उठे सवाल: कृष्णा हांसदा ने लाभुक चयन और स्थानीय हितों पर मांगी पारदर्शिता

बिरसानगर में PM आवास योजना को लेकर नया विवाद

Jamshedpur News: जमशेदपुर के बिरसानगर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत तैयार किए गए आवासों के आवंटन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। भारत आदिवासी पार्टी के झारखंड प्रदेश महासचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा हांसदा ने इस योजना की प्रक्रिया पर कई गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि यदि आवास आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो इसका प्रभाव स्थानीय जनसंख्या संरचना पर पड़ सकता है। कृष्णा हांसदा का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र और स्थानीय लोगों को ही मिले। उन्होंने इस विषय को केवल आवास वितरण का मुद्दा नहीं बल्कि स्थानीय हितों और सामाजिक संतुलन से जुड़ा विषय बताया।

लाभुक चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल


कृष्णा हांसदा ने कहा कि वर्तमान में पूर्वी और पश्चिमी जमशेदपुर के विधायक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों के शीघ्र आवंटन के लिए लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इन आवासों का लाभ किन लोगों को मिलेगा और चयन प्रक्रिया किस आधार पर होगी। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करें कि लाभुकों की पहचान किन मानकों के आधार पर की जा रही है। साथ ही यह भी बताया जाए कि क्या स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने की कोई स्पष्ट नीति अपनाई गई है या नहीं। हांसदा के अनुसार यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी तो इससे भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र और जनसांख्यिकीय संतुलन की चिंता


कृष्णा हांसदा ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिरसानगर और आसपास के क्षेत्रों की सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय संरचना को ध्यान में रखते हुए आवास आवंटन किया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि बड़ी संख्या में बाहरी गैर-झारखंडी लोगों को आवास दिए जाते हैं तो इससे अनुसूचित क्षेत्रों की मौजूदा जनसंख्या संरचना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि झारखंड के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में विकास योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हितों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट नीति बनाकर सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रम या आशंका की स्थिति न बने।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल


कृष्णा हांसदा ने इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका और जुगसलाई विधानसभा क्षेत्रों के विधायक इस विषय पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब स्थानीय हितों और आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने हैं तो जनप्रतिनिधियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर स्पष्ट संवाद और जवाबदेही आवश्यक है ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।

सरकार से पारदर्शिता और स्थानीय प्राथमिकता की मांग


कृष्णा हांसदा ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले आवासों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि लाभुक सूची, चयन प्रक्रिया और स्थानीय लोगों को दी गई प्राथमिकता संबंधी सभी विवरण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि स्थानीय मूल निवासियों के लिए कितने आवास निर्धारित किए गए हैं और अनुसूचित क्षेत्रों की सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए क्या नीति अपनाई गई है। कृष्णा हांसदा ने कहा कि झारखंडी हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे और किसी प्रकार की सामाजिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न न हो।

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