https://omg10.com/4/11146156 केरूआडूंगरी पंचायत में जर्जर विद्यालय और अधूरी विकास योजनाओं पर बढ़ा आक्रोश, प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
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केरूआडूंगरी पंचायत में जर्जर विद्यालय और अधूरी विकास योजनाओं पर बढ़ा आक्रोश, प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

जर्जर विद्यालयों और विकास कार्यों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की पहल तेज

Jamshedpur News: जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत आदिवासी बहुल एवं खनन क्षेत्र केरूआडूंगरी पंचायत में जर्जर विद्यालयों की स्थिति और अधूरी विकास योजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों ने विद्यालयों की मरम्मती, अतिरिक्त कमरों के निर्माण, चारदीवारी और अन्य आधारभूत सुविधाओं को लेकर लगातार प्रशासनिक स्तर पर पहल की है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में देरी का सीधा असर ग्रामीणों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। पंचायत क्षेत्र में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां भवनों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

निरीक्षण और एस्टीमेट तैयार होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ काम

इस मामले को लेकर जिला परिषद चेयरमैन श्रीमती बारी मुर्मू, पंचायत मुखिया श्री कान्हू मुर्मू और जिला परिषद के जूनियर इंजीनियर द्वारा संबंधित विद्यालयों और क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद आवश्यक कार्यों के लिए एस्टीमेट भी तैयार कर लिया गया। इसके बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर निर्माण या मरम्मती कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब तकनीकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो विकास कार्यों को जल्द शुरू किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान हो सके।

सड़क निर्माण में देरी से ग्रामीणों को हो रही परेशानी

पंचायत मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने कहा कि केरूआडूंगरी पंचायत आदिवासी बहुल और खनन प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद अपेक्षित प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं प्राप्त कर पा रही है। उन्होंने बताया कि पंचायत की कई महत्वपूर्ण सड़कें स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। सड़क निर्माण में देरी का असर सीधे तौर पर आम लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है, मजदूरों के आवागमन में बाधा आ रही है और स्कूली बच्चों को भी नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन और ऑटो चालकों को भी खराब सड़कों के कारण अतिरिक्त समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।

विद्यालयों की स्थिति को बताया चिंताजनक, दुर्घटना की आशंका

मुखिया ने विद्यालय भवनों की स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि कई स्कूलों में समय पर मरम्मती नहीं होने के कारण सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द अतिरिक्त कमरों का निर्माण और जर्जर भवनों की मरम्मती नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सुरक्षित विद्यालय भवन और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। ग्रामीणों ने भी बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

उप विकास आयुक्त से मुलाकात कर सौंपा गया आवेदन

इन समस्याओं को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने उप विकास आयुक्त (DDC) से मुलाकात की और पुनः आवेदन सौंपकर जल्द हस्तक्षेप की मांग की। बैठक के दौरान क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और लंबित कार्यों की जानकारी प्रशासन के समक्ष रखी गई। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार डीडीसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि उपलब्ध किसी उपयुक्त फंड के माध्यम से आवश्यक कार्यों को जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों में उम्मीद तो जगी है, लेकिन लोग अब जल्द जमीन पर काम शुरू होते देखना चाहते हैं।

जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जल्द जर्जर स्कूलों की मरम्मती, अतिरिक्त कमरों का निर्माण और अन्य जरूरी विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो पंचायत की जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायत के लोग लंबे समय से विकास कार्यों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि प्रशासन शिक्षा, सड़क और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए जल्द ठोस कार्रवाई करे, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके और विकास योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

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