Jamshedpur News : परसुडीह थाना क्षेत्र के खासमहल चौक से लेकर गोविंदपुर तक की बदहाल और जर्जर सड़क से त्रस्त स्थानीय बस्तीवासियों के सब्र का बांध आखिरकार रविवार को टूट गया। जर्जर सड़क की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे सैकड़ों ग्रामीणों और बस्तीवासियों ने रविवार सुबह बारीगोड़ा फाटक के समीप जुटकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। सुबह 9 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक चले इस तीन घंटे के उग्र प्रदर्शन के दौरान स्थानीय आक्रोशित जनता ने जिला प्रशासन, पथ निर्माण विभाग (RCD) और स्थानीय विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बस्तीवासियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर सड़क निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई, तो वे संपूर्ण क्षेत्र में चक्का जाम करने को बाध्य होंगे।
डेढ़ वर्ष पूर्व हुआ था शिलान्यास, पर काम अब भी अधूरा
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही स्थानीय जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति और अंशु सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि इस महत्वपूर्ण सड़क के नवनिर्माण के लिए आज से लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व ही बड़े तामझाम के साथ शिलान्यास किया गया था। उस वक्त बस्तीवासियों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें जल्द ही इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही का आलम यह है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अब तक महज डेढ़ किलोमीटर सड़क का निर्माण भी ठीक से पूरा नहीं किया जा सका है। शिलान्यास के बाद से ही संवेदक द्वारा बेहद धीमी और कछुआ गति से कार्य किया जा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बारीगोड़ा से गोविंदपुर फाटक तक का सफर हुआ नारकीय
बस्तीवासियों का कहना है कि बारीगोड़ा चौक से लेकर गोविंदपुर फाटक तक सड़क की स्थिति इतनी भयावह और जर्जर हो चुकी है कि यहाँ बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। इन गड्ढों के कारण आए दिन राहगीर, दुपहिया वाहन चालक और साइकिल सवार गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। पूरी सड़क पर गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं और उड़ती धूल के कारण लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से यह पूरी सड़क तालाब की शक्ल अख्तियार कर लेती है, जिससे दुर्घटनाओं का ग्राफ और अधिक बढ़ जाता है।
स्कूली बच्चों और दैनिक मजदूरों की बढ़ी मुश्किलें
सड़क की इस बदहाली का सबसे बुरा असर क्षेत्र के स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना काम पर जाने वाले दैनिक मजदूरों पर पड़ रहा है। अंशु सिंह और कुसुम पूर्ति ने कहा कि इस जर्जर मार्ग से होकर बच्चों का स्कूल आना-जाना पूरी तरह से जोखिम भरा हो गया है। कई बार ऑटो और वैन इन गड्ढों में फंसकर असंतुलित हो जाते हैं, जिससे बच्चों की जान पर बन आती है। वहीं, परसुडीह और गोविंदपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूरों को हर दिन इसी टूटी सड़क से होकर अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। रात के समय स्ट्रीट लाइट की कमी और इन गड्ढों के कारण स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है।
पथ निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि के खिलाफ नारेबाजी
रविवार की सुबह जैसे ही बस्तीवासी बारीगोड़ा फाटक के पास एकत्रित हुए, वहां का माहौल पूरी तरह गरमा गया। हाथों में तख्तियां लिए महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने पथ निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि (विधायक) के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज जनता की इस बुनियादी समस्या पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को स्मार पत्र सौंपने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं देखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उग्र आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी
धरना प्रदर्शन के समापन पर जिला परिषद सदस्य और आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को सीधे तौर पर 15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम (अंतिम चेतावनी) जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर अगले 15 दिनों के भीतर ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य में जनशक्ति बढ़ाकर तेजी नहीं लाई और सड़क को चलने लायक नहीं बनाया, तो इसके बाद किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं होगी। बस्तीवासी स्वतः स्फूर्त होकर खासमहल-गोविंदपुर मुख्य मार्ग को पूरी तरह से जाम (चक्का जाम) कर देंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग की होगी।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हुए स्थानीय लोग
बारीगोड़ा फाटक के समीप आयोजित इस तीन घंटे के धरना प्रदर्शन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ क्षेत्र के कई गणमान्य और प्रबुद्ध नागरिक भी शामिल हुए। मुख्य रूप से अपनी आवाज बुलंद करने वालों में कुसुम पूर्ति, जुगनू वर्मा, कमलेश सिंह, आशुतोष सिंह, सुबोध कुमार समेत भारी संख्या में बारीगोड़ा, खासमहल और आस-पास की बस्तियों के पुरुष व महिलाएं उपस्थित थीं। सभी ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के अस्तित्व और उनके अधिकारों की लड़ाई है, जिसे सड़क बनने तक जारी रखा जाएगा।
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