https://omg10.com/4/11146156 उपायुक्त ने केंद्रीय कारा घाघीडीह, साकची कारा और संप्रेक्षण गृह का किया निरीक्षण, बंदियों व किशोरों की सुविधाओं पर दिया विशेष जोर
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उपायुक्त ने केंद्रीय कारा घाघीडीह, साकची कारा और संप्रेक्षण गृह का किया निरीक्षण, बंदियों व किशोरों की सुविधाओं पर दिया विशेष जोर

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम के जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त राजीव रंजन ने बुधवार को केंद्रीय कारा घाघीडीह, साकची कारा तथा संप्रेक्षण गृह का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इन संस्थानों में उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पुनर्वास कार्यक्रम तथा बंदियों एवं किशोरों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की। निरीक्षण का उद्देश्य संस्थानों की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, मानवीय तथा व्यवस्थित बनाना रहा।


केंद्रीय कारा घाघीडीह में सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा

निरीक्षण की शुरुआत केंद्रीय कारा घाघीडीह से हुई, जहां उपायुक्त ने कारा परिसर की संपूर्ण व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बंदियों के आवासीय बैरकों, भोजन व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल उपलब्धता एवं स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। संबंधित अधिकारियों से बंदियों की दैनिक आवश्यकताओं एवं उपलब्ध सेवाओं की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया गया कि सभी सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उपायुक्त ने कहा कि कारा प्रशासन का दायित्व केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं गरिमापूर्ण जीवन की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कौशल विकास और पुनर्वास कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर बल

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कारा में संचालित कौशल विकास, शिक्षा एवं पुनर्वास कार्यक्रमों की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगारोन्मुख कौशल उपलब्ध कराया जाए तो रिहाई के बाद वे सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।

साकची कारा की प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

इसके बाद उपायुक्त ने साकची कारा पहुंचकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की संख्या तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कारा संचालन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी से ही कारा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही समय-समय पर व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए ताकि बंदियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध हो सके।

संप्रेक्षण गृह में किशोरों की शिक्षा एवं मानसिक विकास पर विशेष ध्यान

संप्रेक्षण गृह के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वहां रह रहे बच्चों एवं किशोरों के लिए उपलब्ध शिक्षा, स्वास्थ्य, परामर्श, मनोरंजन तथा पुनर्वास संबंधी सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने किशोरों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि संप्रेक्षण गृह का उद्देश्य केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है। मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास एवं व्यक्तित्व विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

खेलकूद एवं कौशल प्रशिक्षण से किशोरों को मिलेगा बेहतर भविष्य

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संप्रेक्षण गृह में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ खेलकूद और कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाएं। उनका मानना था कि ऐसी गतिविधियां बच्चों और किशोरों में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ उनके भविष्य निर्माण में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि पुनर्वास को केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्स्थापन के रूप में देखा जाना चाहिए, जिससे किशोर आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

मानवोचित सुविधाएं और नियमित निरीक्षण को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

निरीक्षण के समापन पर उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कारा एवं संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं तथा मानवोचित सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि समय-समय पर समीक्षा एवं निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर एसडीएम धालभूम, एडीसी, कारा अधीक्षक तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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