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तारापदो महतो हत्याकांड: समझौते के उल्लंघन के आरोप पर ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण एसपी से की मुलाकात, एफआईआर निरस्त करने की मांग

Jamshedpur News: बहुचर्चित तारापदो महतो हत्याकांड के बाद उत्पन्न विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। जनवरी माह में हुए आंदोलन के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुए लिखित समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मंगलवार को आंदोलनकारियों एवं आदिवासी-कुड़मी समाज के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जमशेदपुर ग्रामीण एसपी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों पर दर्ज एफआईआर को तत्काल निरस्त करने तथा समझौते के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग उठाई।

तारापदो महतो हत्याकांड के बाद शुरू हुआ था आंदोलन


ज्ञात हो कि 12 जनवरी 2026 को पुतरू टोल प्लाजा के समीप तारापदो महतो हत्याकांड के विरोध में ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा व्यापक आंदोलन किया गया था। आंदोलन की प्रमुख मांगों में घटना के मुख्य साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी, दोषियों को कड़ी सजा तथा पीड़ित परिवार के आश्रित को नियोजन उपलब्ध कराना शामिल था। इस आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। आंदोलन की स्थिति को नियंत्रित करने और समाधान निकालने के लिए जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता आयोजित की गई थी।

प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुआ था लिखित समझौता


आंदोलन के बाद प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच लिखित सहमति बनी थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी समझौते के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था। समझौते के प्रमुख बिंदुओं में यह आश्वासन शामिल था कि आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी ग्रामीण या आंदोलनकारी पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके अलावा हत्याकांड के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी एवं पीड़ित परिवार के सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन समाप्त किया गया था।

एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्रामीणों में बढ़ा असंतोष


प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, समझौते के बावजूद गालूडीह थाना द्वारा आंदोलन में शामिल 16 नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि एफआईआर में कई गैर-जमानती धाराएं भी जोड़ी गई हैं। ग्रामीणों और आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पहले हुए समझौते की भावना के विपरीत है तथा इससे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास कमजोर होगा। प्रतिनिधिमंडल ने इस कार्रवाई को पुनर्विचार योग्य बताते हुए कहा कि यदि समझौते का पालन नहीं होगा तो भविष्य में प्रशासनिक संवाद की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीण एसपी के समक्ष रखी गईं तीन प्रमुख मांगें


मंगलवार को ग्रामीण एसपी के साथ हुई बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत मांग पत्र सौंपा और मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें निम्न थीं—

  • पहली मांग: आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे को पूरी तरह वापस लिया जाए और लिखित समझौते का सम्मान किया जाए।
  • दूसरी मांग: एफआईआर में जोड़ी गई गैर-जमानती धाराओं को हटाया जाए ताकि अनावश्यक गिरफ्तारी की स्थिति उत्पन्न न हो।
  • तीसरी मांग: मामले में जिन महिलाओं को आरोपी बनाया गया है और जिन्हें प्रतिनिधिमंडल निर्दोष बता रहा है, उनके नाम एफआईआर सूची से हटाए जाएं।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक कार्रवाई पर जताई आपत्ति


बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि समझौते के विपरीत जाकर की गई कार्रवाई ग्रामीणों की भावनाओं को आहत करने वाली है। उनका कहना था कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए प्रशासन द्वारा जो भरोसा दिया गया था, उसका पालन होना चाहिए। प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष समीक्षा और न्यायसंगत निर्णय की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रशासन और समाज के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता कायम रहनी चाहिए।

बैठक में कई सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद, जांच का मिला आश्वासन


ग्रामीण एसपी के साथ हुई इस बैठक में आंदोलनकारी टीम एवं आदिवासी-कुड़मी समाज की ओर से हरमोहन महतो, अमित महतो, खोकोन महतो, पूनम जी, राहुल तथा रेखा कालिंदी सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात विस्तार से रखी और प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई। वहीं ग्रामीण एसपी ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद मामले की उचित जांच कराने तथा तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के आगामी कदमों पर टिकी हुई है और यह देखा जाएगा कि इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है।


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