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करनडीह ग्रामसभा का बड़ा फैसला, दूषित पानी के खिलाफ 30 जून को होगा 'हुड़का जाम'

Jamshedpur : जमशेदपुर के करनडीह और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों (अपार्टमेंट्स) से निकलने वाले गंदे और दूषित पानी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया पिछले 15-18 वर्षों से लगातार जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो करनडीह ग्रामसभा ने एक बेहद और ऐतिहासिक फैसला लिया आगामी 30 जून को ग्रामीण करनडीह रेलवे फाटक के समीप (पूर्ण चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन) करेंगे और परसुडीह शीतला चौक से लेकर करनडीह दुर्गापूजा मंडप तक बनी बहुमंजिला इमारतों से बहकर आने वाले मल-मूत्र युक्त पानी को रोकने के लिए नाली को अवरुद्ध कर निर्णय बुधवार को करनडीह स्थित पंचायत भवन में आयोजित एक महा-ग्रामसभा में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता माझी बाबा सोरेन ने इस बैठक में 10 गांवों के ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और अपनी आजीविका तथा पर्यावरण को बचाने के लिए आर-पार की का ऐलान किया।

40-50 एकड़ जमीन बर्बादी की कगार

ग्रामसभा के अंतर्गत आने वाले विभिन्न टोलों के ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि लेकिन परसुडीह और करनडीह मुख्य मार्ग पर बनी अनगिनत बहुमंजिला इमारतों का सीवरेज का पानी सीधे सार्वजनिक नालियों में बहाया जा रहा यह मल-मूत्र और केमिकल युक्त गंदा पानी बहकर सीधे ग्रामीणों के खेतों में जमा हो रहा में लाइनटोला, धरमटोला, और की लगभग 40 से 50 उपजाऊ जमीन पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी खेतों में न केवल गंदा पानी जमा हो रहा है, बल्कि प्लास्टिक, सॉलिड वेस्ट और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का अंबार लग गया इस वजह से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है और किसान अपने ही खेतों में पैर रखने से कतरा रहे

इनकी आजीविका पर है संकट

इस गंभीर जल प्रदूषण के कारण स्थानीय (जमीन के मालिकों) के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई मुख्य रूप से मधु सोरेन, हांसदा, सोरेन और कुंवर सोरेन समेत कई अन्य के खेत इस गंदे पानी की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो चुके किसानों का कहना है कि दूषित पानी और कचरे के भारी जमाव के कारण वे पिछले कई सीजन से किसी भी प्रकार का कृषि कार्य या धान की बुवाई नहीं कर पा रहे सालों से खेतों में जमा हो रही गंदगी ने मिट्टी को जहरीला बना दिया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना रहा

नियमों को ताक पर रखकर बिना बने बहुमंजिला मकान

ग्रामसभा को संबोधित करते हुए माझी बाबा सोरेन ने कहा कि नियम और प्रावधानों के अनुसार, किसी भी ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत या फ्लैट्स के निर्माण के लिए नियम हर सोसायटी या बहुमंजिला मकान का अपना एक स्वतंत्र सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट या सिस्टम होना अनिवार्य है, ताकि गंदा पानी सार्वजनिक या खेतों में न की हकीकत यह है कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण बिना किसी एनओसी के अनगिनत बहुमंजिला इमारतों का निर्माण से कर दिया गया सभी नियम और कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और इसका खामियाजा गरीब रैयती परिवारों को भुगतना रहा माझी बाबा सोरेन

भू-गर्भीय जलस्तर में भारी गिरावट

800 फीट पर भी पानी इमारतों के निर्माण और अत्यधिक दोहन के कारण पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संकट हो गया के अनियंत्रित दोहन से ग्रामीण क्षेत्रों में भू-गर्भीय जलस्तर बहुत तेजी से नीचे जा रहा सिंहभूम की जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित एनओसी के परसुडीह, प्रमथनगर, हलुदबनी और आसपास के इलाकों में फ्लैट्स का जाल बिछ गया इस अवैध और अनियोजित निर्माण का नतीजा यह है कि जैसे इलाकों में 700 से 800 फीट की गहराई तक बोरिंग करने के बाद भी पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा हालांकि, अब जिला प्रशासन ऐसे अवैध निर्माणों पर शिकंजा रहा है और नए निर्माणों पर रोक लगाई जा रही

पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों का संकल्प

इस महा-संकट से निपटने और पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए ग्रामसभा में ग्रामीणों ने खुद भी एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय संकल्प लिया करनडीह के सभी 10 टोलों के ग्रामीणों ने तय किया है कि वे जल संरक्षण के लिए अपने-अपने घरों में का निर्माण पहल का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल और घरेलू उपयोग के पानी को जमीन के भीतर वापस भेजना है, ताकि क्षेत्र का भू-गर्भीय जलस्तर सुधर सके और आने वाले समय में गर्मी के दिनों में पेयजल का संकट न इसके अलावा, ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया कि वे अपने टोलों से पानी बाहर निकालने के लिए किसी भी ऐसी नाली का निर्माण नहीं करेंगे जो खेतों की तरफ जाती अगर नाली बनेगी भी, तो उसका सीधा सिर्फ और सिर्फ से होगा

जनप्रतियनिधियों की मांग, अविलंब बने वैकल्पिक सीवरेज सिस्टम

इस पूरे विवाद और जन-आक्रोश को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया है और जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की

ग्रामीण पिछले 15-18 सालों से इस समस्या को झेल रहे हैं और लगातार विरोध कर रहे प्रखंड और जिला प्रशासन को कई बार लिखित में अवगत कराया गया है, लेकिन कोई समाधान नहीं रैयती परिवारों की रोजी-रोटी छिन रही है, इसलिए उनका यह विरोध पूरी तरह जायज प्रशासन को तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, अन्यथा यह विवाद थमने वाला नहीं
                                                             -सरस्वती टुडू (मुखिया, दक्षिण करनडीह पंचायत)

मकान मालिकों और बिल्डरों को किसी के नुकसान की कोई चिंता नहीं जिला प्रशासन को चाहिए कि वह सभी बहुमंजिला इमारतों के मालिकों और सोसायटियों का सर्वे कराए और उनके लिए स्वतंत्र सीवरेज सिस्टम बनाना अनिवार्य जब तक सोसायटियां अपना कचरा प्रबंधन खुद नहीं करेंगी, तब तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान संभव नहीं
                                                                                     -सिनी सोरेन (मुखिया, उत्तरी करनडीह पंचायत)

ग्रामसभा में एकजुट हुए इन 10 टोलों के ग्रामीण

बुधवार को पंचायत भवन में हुई इस विशेष बैठक की ताकत ग्रामीणों की एकजुटता करनडीह ग्रामसभा के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख 10 टोलों के लोग इस बैठक में अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे इनमें सारजोमटोला, बोदराटोला, माझीटोला, गैंताडीह, कोचाटोला, लड़काटोला, लाइनटोला, दुखूटोला, धरमटोला, आदि प्रमुख अब जिला प्रशासन को 15 दिनों का दिया गया अल्टीमेटम समाप्त हो चुका है. चूंकि अधिकारियों ने अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की है, इसलिए 30 जून को होने वाला 'हुड़का जाम' होगा और जब तक गंदे पानी का बहाव हमेशा के लिए बंद नहीं होता, ग्रामीण पीछे नहीं हटेंगे.

 

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