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विश्व आदिवासी दिवस 2026: 9 अगस्त को झारखंड सरकार आयोजित करेगी भव्य आदिवासी महोत्सव, ट्राइबल बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण

विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड में होगा तीन दिवसीय भव्य आयोजन

Ranchi News : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड सरकार इस वर्ष 9 अगस्त से भव्य आदिवासी महोत्सव आयोजित करने जा रही है। पिछले वर्ष पद्म भूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के कारण यह आयोजन नहीं हो सका था, लेकिन इस बार राज्य सरकार इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रही है। आयोजन को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे जनजातीय पहचान, परंपरा, कला, इतिहास और आधुनिक विकास के संगम के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में प्रस्तावित इस तीन दिवसीय आयोजन में राज्य के विभिन्न जिलों से जनजातीय कलाकार, शिल्पकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल भाग लेंगे। सरकार का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

ट्राइबल बाजार बनेगा महोत्सव का मुख्य आकर्षण

इस बार महोत्सव का सबसे खास आकर्षण “ट्राइबल बाजार” होगा। इसमें जनजातीय समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था की जाएगी। इस बाजार में पारंपरिक हस्तशिल्प, हाथ से बने उत्पाद, स्थानीय खाद्य सामग्री, पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कई उत्पाद लोगों के लिए उपलब्ध रहेंगे।
इस पहल का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं बल्कि जनजातीय समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देना है। इससे स्थानीय कारीगरों और उत्पाद निर्माताओं को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि आदिवासी उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सके।

जनजातीय संस्कृति, खान-पान और योगदान को मिलेगी विशेष पहचान

महोत्सव में झारखंड की जनजातीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और खान-पान को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही झारखंड और देश के निर्माण में जनजातीय समाज के ऐतिहासिक योगदान को भी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इस बार प्रदर्शनी को पारंपरिक मॉडल से अलग एक “इमर्सिव कल्चरल इकोसिस्टम” के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को केवल देखने का अनुभव नहीं बल्कि जनजातीय जीवन शैली को समझने और महसूस करने का अवसर देना है। यहां एक विशेष “नॉलेज जोन” भी बनाया जाएगा, जहां आगंतुकों को जनजातीय समुदाय की परंपराओं, सामाजिक संरचना, जीवन मूल्यों और ऐतिहासिक योगदान की जानकारी दी जाएगी।

जतरा, लोक प्रस्तुति और हजारों कलाकारों की भागीदारी

महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक जतरा से होगी। इस दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कलाकार शामिल होंगे। अनुमान है कि करीब 10 हजार स्थानीय कलाकार इस आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मंचीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे न केवल कलाकारों को मंच मिलेगा बल्कि युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य इस आयोजन को आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित करना है।

ड्रोन, लेजर और फायरवर्क शो से दिखेगी आधुनिक प्रस्तुति

आदिवासी महोत्सव में इस बार आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान ड्रोन शो, लाइट शो और लेजर शो आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से जनजातीय संस्कृति और झारखंड की पहचान को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा समापन अवसर पर विशेष फायरवर्क शो का आयोजन भी प्रस्तावित है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का यह संयोजन आयोजन को दर्शकों के लिए अधिक आकर्षक बनाएगा।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान पर आधारित होंगे विशेष कार्यक्रम

इस वर्ष आयोजित आदिवासी महोत्सव में पद्म भूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन को विशेष रूप से याद किया जाएगा। उनके जीवन, संघर्ष और झारखंड राज्य निर्माण में योगदान को विभिन्न कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मंचीय प्रस्तुतियों, एलईडी शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को उनके योगदान से अवगत कराया जाएगा। सरकार की योजना है कि यह आयोजन जनजातीय गौरव और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का माध्यम बने।


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