Jamshedpur News: भारत के इंजीनियरिंग क्षेत्र ने निर्यात के मोर्चे पर एक नया इतिहास रच दिया है। मई 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात पहली बार 12 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक विकास और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का संकेत मानी जा रही है।
मई 2026 में पहली बार 12 अरब डॉलर से अधिक पहुंचा इंजीनियरिंग निर्यात
भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात ने मई 2026 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में इंजीनियरिंग निर्यात 12.31 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 9.89 अरब डॉलर था। इस प्रकार साल-दर-साल आधार पर लगभग 24.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता और व्यापारिक दबाव बने हुए हैं। इसके बावजूद भारत ने अपनी उत्पादन क्षमता और निर्यात नेटवर्क को मजबूत बनाते हुए यह नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
कुल माल निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की बढ़ी हिस्सेदारी
भारत के कुल माल निर्यात (Merchandise Export) में इंजीनियरिंग क्षेत्र का योगदान लगातार मजबूत हो रहा है। मई 2026 में कुल निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 27.2 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले विनिर्माण और इंजीनियरिंग उत्पादों के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी गति मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग निर्यात की बढ़ती हिस्सेदारी भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
किन उत्पादों ने बढ़ाया निर्यात का आंकड़ा
इंजीनियरिंग निर्यात में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख उत्पाद श्रेणियों का योगदान रहा। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण, जहाज एवं तैरते ढांचे, मोटर वाहन तथा लोहा-इस्पात आधारित उत्पाद शामिल रहे। इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ने, गुणवत्ता सुधार और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्माण के कारण भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार इंजीनियरिंग उत्पादों की कुल 34 श्रेणियों में से 28 श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वृद्धि केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक स्तर पर निर्यात में सुधार हुआ।
वैश्विक सप्लाई चेन बदलाव से भारत को मिला अवसर
दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक संतुलित और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेष रूप से किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इस बदलाव से भारत के इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा अवसर मिल रहा है। वैश्विक कंपनियां अब वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश कर रही हैं और भारत इस दौड़ में एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि भारत बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन क्षमता पर लगातार निवेश बनाए रखता है तो आने वाले वर्षों में निर्यात की गति और तेज हो सकती है।
नीति समर्थन और व्यापारिक सुविधाएं बनेंगी सफलता की कुंजी
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात वृद्धि को बनाए रखने के लिए सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए तेज नीति राहत, सस्ती व्यापारिक वित्त व्यवस्था और बेहतर जोखिम सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाना, नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाना और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना भी आवश्यक होगा। यदि इन क्षेत्रों में निरंतर सुधार किया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग निर्यात के नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।
2030 तक 250 अरब डॉलर निर्यात का रखा गया लक्ष्य
भारत ने इंजीनियरिंग निर्यात के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य भी तय किया है। उद्योग क्षेत्र के अनुसार उचित नीति समर्थन, निवेश और वैश्विक अवसरों का लाभ उठाकर भारत वर्ष 2030 तक 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। यह लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन सकता है।
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