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जमशेदपुर में गूंजा ‘वंदे मातरम्’, 81वें वार्षिक सम्मेलन में संस्कृति और भाषा बचाने का बड़ा संदेश

Jamshedpur News: जमशेदपुर में झारखंड बंगाली समिति, जमशेदपुर शाखा का 81वां वार्षिक सम्मेलन कदमा स्थित उलियान के निर्मल भवन में बड़े ही भव्य तरीके से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बंगाली समाज के लोग शामिल हुए। पूरे आयोजन में पारंपरिक संस्कृति, साहित्य और सामाजिक एकजुटता की झलक साफ देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल समाज को एक मंच पर लाना था, बल्कि बंगाली भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराना था।

समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने का लिया संकल्प 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी और श्रीलेदर्स के पार्टनर शेखर डे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष विद्रोह मित्र ने की। इसके अलावा नेताजी सुभाष मंच के अध्यक्ष परेश कुमार नंदी, संयोजक निखिल दत्त, नीति निर्धारक झरना कर और महासचिव तपन सेनशर्मा जैसे कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने मंच से समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने पर जोर दिया।

भाषा व साहित्य के लिए कम करने वाले लोग सम्मान के पात्र 
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसे स्वपन दासगुप्ता ने प्रस्तुत किया। इसके बाद मंच संचालन आशीष गुप्ता, निसार अमीन और पूरबी चटर्जी ने कुशलतापूर्वक संभाला। अपने संबोधन में शेखर डे ने कहा कि उन्हें बंगाली होने पर गर्व है और जो लोग भाषा एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए काम कर रहे हैं, वे वास्तव में सम्मान के पात्र हैं। वहीं विद्रोह मित्र ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को आगे आकर अपनी भाषा और संस्कृति की जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी यह परंपरा जीवित रह पाएगी।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम पर एक ट्रेन चलाने की मांग
कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई गई। समिति के सदस्यों ने करमाटांड़ से कोलकाता तक महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम पर एक ट्रेन चलाने की मांग की। साथ ही यह भी बताया गया कि करमाटार स्थित विद्यासागर महाशय के होम्योपैथिक क्लिनिक और लाइब्रेरी को पुनः शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा भी देगी।

वंदे मातरम’ पर साहित्यिक चर्चा का आयोजन 
सम्मेलन के दूसरे सत्र में महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ के साढ़े 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष साहित्यिक चर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने इस गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। चर्चा के दौरान यह बताया गया कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति और आत्मगौरव का प्रतीक है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम के अंत में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें शमिता रक्षित, अदिति सेनगुप्ता, तपती दत्ता, देवयानी दत्ता, शर्मिष्ठा धर, शम्पा मुखर्जी, दीपा बनर्जी, सुपर्णा सेन शर्मा और बुलबुल घोष सहित कई कलाकारों ने मनमोहक गीत प्रस्तुत किए। तबले पर डॉ. पार्थ दास ने शानदार संगत दी। इस अवसर पर निसार अमीन द्वारा संपादित समिति की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। साथ ही पुरवी घोष, शर्मिला पाल, स्तोता दासगुप्ता, सिद्धार्थ सेन, बिमल चक्रवर्ती और कावेरी सरकार समेत कई सदस्यों ने कविता पाठ कर माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया।

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