उत्तरी सारजमदा में 15वें वित्त आयोग की सड़क निर्माण योजना पर विवाद, घटिया सामग्री के आरोप पर जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने जांच की मांग

निधिर टोला में सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों का बढ़ा विरोध

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के उत्तरी सारजमदा पंचायत के निधिर टोला में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए जा रहे फेवर ब्लॉक सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है और घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की शुरुआत से ही कई तकनीकी खामियां दिखाई दे रही हैं, जिसके कारण भविष्य में सड़क के जल्द खराब होने की आशंका बनी हुई है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

घटिया सामग्री और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे फेवर ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में यदि पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होगी तो सड़क पर जलजमाव होगा, जिससे सड़क जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाएगी और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे सरकारी राशि का दुरुपयोग होने की आशंका भी जताई जा रही है।

ग्रामीणों की शिकायत पर पहुंचीं जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति

निर्माण कार्य में अनियमितता की सूचना मिलने के बाद जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सड़क निर्माण स्थल का जायजा लिया, जहां कथित रूप से घटिया सामग्री के उपयोग और जल निकासी व्यवस्था की कमी को लेकर ग्रामीणों ने विस्तार से अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। कुसुम पूर्ति ने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर जांच कराने की मांग की जाएगी, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई हो सके।

मुखिया पर ग्रामीणों की अनदेखी करने का आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि सड़क निर्माण कार्य में सामने आ रही कमियों की जानकारी देने के लिए कई बार फोन के माध्यम से मुखिया को बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मौके पर आने की आवश्यकता नहीं समझी। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ गया। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दें और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं निगरानी रखें। ग्रामीणों ने मांग की कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए।

जांच के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का दिया आश्वासन

जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सड़क निर्माण कार्य की विभागीय जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी अनियमितता या सरकारी मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, इसलिए निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। ग्रामीणों ने भी मांग की कि जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर निगरानी रखी जाए और आवश्यक होने पर कार्य को रोका जाए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो तथा क्षेत्र के लोगों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़क की सुविधा मिल सके।

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